रमजान मुसलमानों के लिए इबादत और आत्मअनुशासन का महीना माना जाता है। इस पूरे महीने में रोजेदार दिनभर रोजा रखते हैं और अल्लाह की इबादत में समय बिताते हैं। सुबह फज्र की नमाज से पहले सेहरी की जाती है और फिर सूर्यास्त तक रोजा रखा जाता है।
शाम को जैसे ही मगरिब की नमाज का वक्त होता है, रोजेदार इफ्तार करके रोजा खोलते हैं। रमजान के आखिरी दिनों में इबादत की अहमियत और भी बढ़ जाती है। आज यानी 13 मार्च 2026 को रमजान का 23वां रोजा रखा जा रहा है। इसलिए रोजेदारों के लिए अपने शहर के अनुसार इफ्तार का सही समय जानना जरूरी हो जाता है।
आज 13 मार्च 2026 को भारत के प्रमुख शहरों में इफ्तार का समय
| शहर | इफ्तार का समय (अनुमानित) |
| दिल्ली में इफ्तार का टाइम | शाम 6:28 PM |
| नोएडा में इफ्तार का टाइम | शाम 6:28 PM |
| गाजियाबाद में इफ्तार का टाइम | शाम 6:28 PM |
| गुरुग्राम में इफ्तार का टाइम | शाम 6:29 PM |
| फरीदाबाद में इफ्तार का टाइम | शाम 6:28 PM |
| चंडीगढ़ में इफ्तार का टाइम | शाम 6:30 PM |
| जयपुर में इफ्तार का टाइम | शाम 6:34 PM |
| लखनऊ में इफ्तार का टाइम | शाम 6:15 PM |
| कानपुर में इफ्तार का टाइम | शाम 6:17 PM |
| पटना में इफ्तार का टाइम | शाम 5:57 PM |
| कोलकाता में इफ्तार का टाइम | शाम 5:46 PM |
| भोपाल में इफ्तार का टाइम | शाम 6:35 PM |
| अहमदाबाद में इफ्तार का टाइम | शाम 6:47 PM |
| सूरत में इफ्तार का टाइम | शाम 6:46 PM |
| मुंबई में इफ्तार का टाइम | शाम 6:48 PM |
| पुणे में इफ्तार का टाइम | शाम 6:45 PM |
| हैदराबादमें इफ्तार का टाइम | शाम 6:27 PM |
| बेंगलुरु में इफ्तार का टाइम | शाम 6:31 PM |
| चेन्नई में इफ्तार का टाइम | शाम 6:21 PM |
| श्रीनगर में इफ्तार का टाइम | शाम 6:33 PM |
रमजान में नमाज का बढ़ जाता है महत्व
रमजान के महीने में नमाज की अहमियत और भी बढ़ जाती है। मुसलमान पांच वक्त की नमाज के साथ-साथ तरावीह की नमाज भी पढ़ते हैं, जो खास तौर पर रमजान में अदा की जाती है। तरावीह की नमाज में कुरआन शरीफ की तिलावत की जाती है और मस्जिदों में बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होते हैं। यह नमाज इशा की नमाज के बाद पढ़ी जाती है और रमजान के पूरे महीने में इसका विशेष महत्व माना जाता है।
इफ्तार के वक्त क्या करना बेहतर माना जाता है
इफ्तार के समय रोजेदार सबसे पहले अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं। आमतौर पर रोजा खजूर और पानी से खोला जाता है, क्योंकि यह पैगंबर हजरत मुहम्मद की सुन्नत मानी जाती है। इसके बाद मगरिब की नमाज अदा की जाती है और फिर भोजन किया जाता है। इफ्तार के समय अक्सर यह दुआ पढ़ी जाती है —
“अल्लाहुम्मा लका सुम्तु वा अला रिज्किका अफ्तर्तु।”
अर्थ — ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोजा रखा और तेरी दी हुई रोजी से इफ्तार कर रहा हूं।
रमजान के आखिरी दिनों की खास अहमियत
रमजान के अंतिम दस दिन मुसलमानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन दिनों में लोग ज्यादा इबादत करते हैं, कुरआन की तिलावत करते हैं और अल्लाह से दुआ मांगते हैं माना जाता है कि इसी दौरान लैलतुल कद्र जैसी खास रात भी आती है, जिसे हजार महीनों से बेहतर बताया गया है। इसलिए रमजान के इन दिनों में लोग इबादत पर विशेष ध्यान देते हैं।
