आज 27 जून 2026 को शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत विशेष है। आज ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर शनि प्रदोष व्रत (Shani Pradosh Vrat) रखा जा रहा है। यह व्रत भगवान शिव और शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की विधिवत पूजा, अभिषेक, मंत्र जाप और दीपदान करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं तथा जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का आगमन होता है।
इस बार शनि प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन भगवान शिव के साथ शनिदेव की पूजा करने से शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैया और ग्रह बाधाओं से राहत मिलने की मान्यता है। आज प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित कर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। आइए विस्तार से जानते हैं आज कौन सा व्रत है, शनि प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त, प्रदोष काल कब से कब तक रहेगा और इस दिन का धार्मिक महत्व क्या है।
आज प्रदोष व्रत महत्व
आज 27 जून 2026, शनिवार को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर शनि प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है, लेकिन जब यह शनिवार के दिन पड़ता है तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ शनिदेव की पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि प्रदोष व्रत रखने और प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और जीवन की अनेक बाधाओं से राहत मिलती है। यह व्रत सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, संतान सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
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27 जून 2026 शनि प्रदोष व्रत का पूजा मुहूर्त
शनि प्रदोष व्रत में सबसे महत्वपूर्ण समय प्रदोष काल माना जाता है, क्योंकि इसी अवधि में भगवान शिव की पूजा करने का विधान है। आज 27 जून 2026 को प्रदोष काल शाम 7:22 बजे से रात 9:24 बजे तक रहेगा। इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित कर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। यदि संभव हो तो इस समय शिव चालीसा, रुद्राष्टकम या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ भी करें। इससे आपके कष्टों का नाश होगा और जीवन में तरक्की मिलेगी।
27 जून 2026 प्रदोष काल कब से कब तक रहेगा
आज 27 जून 2026 को प्रदोष काल शाम 7:22 बजे से रात 9:24 बजे तक रहेगा। सूर्यास्त के बाद का यह समय भगवान शिव की उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। प्रदोष काल में प्रदोष व्रत करने वाले लोग स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शिवलिंग का पंचामृत, जल या गंगाजल से अभिषेक करें। शनि प्रदोष होने के कारण शनिदेव को तिल का तेल, काले तिल और दीप अर्पित करना भी शुभ रहेगा।
