कंप्यूटर, लैपटॉप या फिर फोन के कीपैड अगर आप देखेंगे तो आप पाएंगे कि कीपैड पर जो लेटर्स होते हैं वो क्रम में नहीं होते। वो लेटर्स उल्टे-सीधे होते हैं, लेकिन आपने कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? क्यों ये लेटर्स A, B, C की तरह क्रम में नहीं होते?
आइए, इस सवाल का जवाब हम आपको देते हैं। सबसे पहले आपको बता दें कि कीबोर्ड के इस लेआउट को QWERTY लेआउट कहते हैं। आज के समय में ये लेआउट कंप्यूटर और टाइपिंग का एक अभिन्न हिस्सा है।
QWERTY लेआउट को 19वीं सदी में क्रिस्टोफर लैथम शोल्स ने डिजाइन किया था। उससे पहले शोल्स ने 1860 के दशक में टाइपराइटर का आविष्कार किया था। शोल्स ने जब टाइपराइटर का आविष्कार किया था तब उन्होंने कीपैड पर अक्षरों को वर्णमाला के क्रम में ही व्यवस्थित किया था।
ऐसे में जल्द ही उनके सामने एक समस्या खड़ी हो गई। दरअसल, हुआ यूं कि क्रम में व्यवस्थित अक्षरों की वजह से तेज टाइपिंग नहीं हो पाती थी, जिसे "जैमिंग" कहा जाता था।
इसी समस्या को हल करने के लिए शोल्स ने सन् 1873 में QWERTY लेआउट डिजाइन किया था। इस लेआउट का मुख्य उद्देश्य था कि टाइपिंग की स्पीड को थोड़ा कम कर सामान्य रूप से उपयोग होने वाले अक्षरों (जैसे E, T, A) को ऐसी जगह पर रखा जाए कि जिससे मैकेनिकल आर्म्स कम उलझें।
इसके लिए, उन्होंने अंग्रेजी भाषा में सबसे अधिक उपयोग होने वाले अक्षरों और उनके संयोजनों (letter pairs) का एक विश्लेषण किया और उन्हें कीबोर्ड पर इस तरह बांटा कि टाइपिंग एकदम परफेक्ट और तेज हो।
QWERTY लेआउट को अंग्रेजी भाषा के आधार पर बनाया गया था। जिसमें सामान्य शब्दों और अक्षरों के जोड़ों (जैसे TH, ER, ON) को ध्यान में रखा गया। उदाहरण के लिए, E और T जैसे अक्षर, जो अंग्रेजी में सबसे ज्यादा उपयोग होते हैं, कीबोर्ड के मध्य और आसानी से पहुंचने वाली जगहों पर रखा गया।
QWERTY लेआउट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि दोनों हाथों का उपयोग संतुलित हो। सामान्य अक्षरों को बाएँ और दाएँ हाथ के बीच बांटा गया ताकि टाइपिंग तेज और कम थकाने वाली हो।