नीलामी की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती हैं, जैसे किसी छोटी सी चीज के लिए लगी बड़ी बोली। हाल में कुछ ऐसा ही अमेरिका में हुआ, जब 3 सिक्कों के लिए करीब 7 करोड़ रुपए की बोली लगाई गई। आइए आपको बताते हैं कि इन तीन सिक्कों में ऐसा क्या खास था कि इतनी ज्यादा बोली लगाई गई।
दरअसल, अमेरिका में 1 सेंट के सिक्के बंद कर दिए गए हैं। जैसे हमारे भारत में 1 पैसा रुपए की सबसे छोटी इकाई है, वैसे ही अमेरिका में 1 सेंट डॉलर की सबसे छोटी इकाई है। अब 1 सेंट के ये सिक्के मार्केट सर्कुलेशन के लिए नहीं बनाए जाएंगे।
232 साल पहले चलन में आया 1 सेंट का सिक्का अब अमेरिका के लिए इतिहास बन चुका है। सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि 1 सेंट का सिक्का बनाने के लिए सरकार को उसके मूल्य से ज्यादा खर्च करना पड़ता था। बता दें कि 1 सेंट के 1 सिक्के को बनाने में अमेरिकी सरकार को करीब 3.7 सेंट खर्च करने पड़ते थे। अब अमेरिकी सरकार के इस फैसले से हर साल उनके लाखों डॉलर बचेंगे।
नवंबर 2025 में यूएस मिंट ने आखिरी बार 1 सेंट के सिक्के (पेनी) ढाले। आखिरी खेप को यादगार बनाने के लिए मिंट ने इस सिक्के के कुल 232 सेट बनाए। सिक्के के 232 सेट इसलिए बनाए गए क्योंकि यह पेनी के 232 साल के इतिहास का प्रतीक है।
हर सेट में तीन सिक्के बनाए गए थे। जहां हर सेट में मौजूद सिक्कों में एक फिलाडेल्फिया मिंट का सामान्य 2025 पेनी था, दूसरा डेनवर मिंट का 2025-D पेनी, और इनमें एक खास 24 कैरेट सोने का बना हुआ पेनी शामिल था। लास्ट के सभी 232 सेट के सिक्कों पर ग्रीक लेटर 'ओमेगा' (Ω) का निशान लगा था, जो किसी भी चीज के अंत का प्रतीक है।
अमेरिकी सरकार ने इन सिक्कों की आखिरी खेप से भी खूब कमाई की, जहां उन्होंने इन सिक्कों के 232 सेट्स को सर्कुलेशन में डालने की बजाय उन्हें नीलाम कर दिया। स्टैक्स बोवर्स गैलरीज ने दिसंबर 2025 में इस नीलामी का आयोजन किया, जहां सभी 232 सेट्स की कुल बोली 16.76 मिलियन डॉलर यानी लगभग 140 करोड़ रुपये रही। औसतन हर सेट 72 हजार डॉलर का बिका।
इन सभी सिक्कों के सेट्स में सबसे खास था 232वां सेट, यानी आखिरी वाला। इसमें अमेरिका के सबसे अंतिम तीन पेनी थे, साथ ही वो तीन डाई भी जो इन सिक्कों को बनाने में इस्तेमाल हुईं। इस सेट के लिए 8 लाख डॉलर, यानी करीब 7 करोड़ रुपये, की बोली लगाई गई।