हम जिस ऐतिहासिक शहर की बात कर रहे हैं, वह जॉर्डन का पेट्रा शहर है। जिसकी वास्तुकला का लोहा पूरी दुनिया मानती है। जी हां, इस शहर में 2000 साल पहले ही पानी को बचाने का ऐसा अनोखा सिस्टम तैयार कर लिया गया था, जो आज की आधुनिक दुनिया की तकनीकों को टक्कर देती है।
पेट्रा का नाम आते ही हमारे सामने चट्टानों को काटकर बनाया गया खूबसूरत शहर आता है लेकिन इस प्राचीन शहर की सबसे हैरान करने वाली बात इसकी इमारतें ही नहीं, बल्कि पानी बचाने और उसे शहर तक पहुंचाने का तरीका था। आज से करीब 2,000 साल पहले नबातियन लोगों ने ऐसे इलाके में पानी का इंतजाम किया था, जहां बारिश कम होती थी। UNESCO भी पेट्रा के इस प्राचीन जल-प्रबंधन सिस्टम को इसकी खासियतों में गिनता है।
पेट्रा आज के जॉर्डन में स्थित है। यह कभी नबातियन सभ्यता की राजधानी और एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था। यहां से अरब, मिस्र और सीरिया-फोनीशिया के बीच व्यापारिक रास्ते गुजरते थे। ऐसे में इतने बड़े शहर के लिए पानी सबसे बड़ी जरूरतों में से एक था। पेट्रा के लोगों ने बारिश के पानी को यूं ही बहने नहीं दिया। उन्होंने पहाड़ों और चट्टानों के बीच नहरें, बांध, सुरंगें और जलाशय बनाए। बारिश होने पर पानी को इन रास्तों से मोड़कर बड़े टैंकों और भूमिगत सिस्टर्न में जमा किया जाता था।
इस व्यवस्था की खास बात यह थी कि पानी को जरूरत के हिसाब से नियंत्रित किया जा सकता था। यानी बारिश के मौसम में पानी जमा होता और बाद में सूखे समय में उसका इस्तेमाल किया जाता था। नबातियन लोगों ने चट्टानों पर ऐसे चैनल बनाए थे जो बारिश के पानी को मोड़ देते थे, ताकि पानी बहकर इमारतों को नुकसान न पहुंचाए। पेट्रा के आसपास रहने वाले कुछ समुदाय आज भी पुराने जल-स्रोतों का इस्तेमाल करते रहे हैं। यूनेस्को (UNESCO) के अनुसार क्षेत्र के कुछ बेदु (Bedu) समुदाय नबातियन दौर की पानी जमा करने वाली टंकियों और गुफाओं का उपयोग करते रहे हैं।
पेट्रा में सिर्फ पानी जमा करने की योजना नहीं थी, बल्कि अचानक आने वाली बाढ़ से शहर को बचाने के लिए भी इंतजाम किया गया था। चट्टानों के बीच बने बांध और सुरंगें पानी की दिशा बदलने में मदद करती थीं। UNESCO के अनुसार, यहां का एक प्राचीन डायवर्जन डैम और लगभग 90 मीटर लंबी सुरंग बाढ़ के पानी को दूसरी दिशा में मोड़ने के लिए इस्तेमाल होती थी।
इसी शानदार जल-प्रबंधन व्यवस्था की वजह से बेहद शुष्क इलाके में भी पेट्रा में लंबे समय तक बड़ी आबादी बस सकी। नहरों और जलाशयों के इस नेटवर्क ने शहर के विकास में अहम भूमिका निभाई। यही वजह है कि पेट्रा को सिर्फ चट्टानों में तराशी गई इमारतों के लिए नहीं, बल्कि इसकी प्राचीन जल इंजीनियरिंग के लिए भी याद किया जाता है। लगभग 2,000 साल पहले बनाया गया यह सिस्टम आज भी इंसानों की समझ और तकनीकी सोच की शानदार मिसाल माना जाता है।
पेट्रा (Petra) नाम ग्रीक शब्द से आया है, जिसका अर्थ चट्टान/पत्थर से जुड़ा है। पेट्रा के आसपास का इलाका काफी शुष्क है, लेकिन यहां प्राचीन लोगों ने बारिश के पानी को जमा करने और नियंत्रित करने की शानदार व्यवस्था बनाई थी। यहां पानी पहुंचाने के लिए चैनल, एक्वाडक्ट, सुरंगें और बड़ी-बड़ी पानी की टंकियां बनाई गई थीं।
यहां की कई विशाल इमारतों के सामने के हिस्से सीधे लाल बलुआ पत्थर की चट्टानों को काटकर बनाए गए हैं। UNESCO के अनुसार यहां अलग-अलग दौर की सभ्यताओं के अवशेष मौजूद हैं। जैसे- मंदिर, मकबरे, चर्च, सड़कें और पानी से जुड़ी संरचनाएं। पेट्रा कभी अरब, मिस्र, सीरिया-फोनीशिया और दूर चीन से आने वाले व्यापारिक रास्तों के बीच महत्वपूर्ण केंद्र था। यहां मसालों, रेशम और दूसरी चीजों का व्यापार होता था।