धरती पर इन रेगिस्तानों में इतना सारा रेत आया कहां से? हमेशा से है, ऐसा सोचते हैं तो गलत हैं आप

जब भी हमारे दिमाग में रेगिस्तान का नाम आता है, तो आंखों के सामने दूर-दूर तक फैली रेत, ऊंचे-ऊंचे रेत के टीले और तेज धूप का नजारा घूमने लगता है। ऐसा लगता है जैसे ये जगह हमेशा से ऐसी ही रही होगी लेकिन अगर आप भी यह सोचते हैं कि रेगिस्तान करोड़ों साल से ऐसे ही रेत से भरे हुए हैं, तो यहां आप गलत हैं। दरअसल, धरती पर रेगिस्तानों में मौजूद रेत की उत्पत्ति की कहानी थोड़ी अलग है। आपको बता दें कि रेगिस्तान में इतने सारे रेत हमेशा से नहीं थे। ये रेत आए कहां से? इस बारे में आपको शायदा ही इसका अंदाजा होगा। तो चलिए आज हम आपको इस सवाल का जवाब बता देते हैं। जिसे सुनने के बाद यकीनन आपकी हैरानी का कोई ठिकाना नहीं होगा।

Authored by: पंकज यादवUpdated Aug 10 2026, 14:05 IST
रेगिस्तान में कहां से आई इतनी सारी रेत?Image Credit : IStock01 / 09

रेगिस्तान में कहां से आई इतनी सारी रेत?

सबसे पहले तो आप यह जान लीजिए कि रेगिस्तान की रेत एक दिन में या कुछ सालों में नहीं बनी। बल्कि इसके होने के पीछे हजारों सालों तक चट्टानों के टूटने, मौसम के बदलाव, हवा और पानी जैसे कई प्राकृतिक कारणों का हाथ है।

चट्टानों से शुरू होती है इसकी कहानीImage Credit : IStock02 / 09

चट्टानों से शुरू होती है इसकी कहानी

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि रेगिस्तान में मौजूद रेत का एक बड़ा हिस्सा कभी चट्टान हुआ करते थे। समय के साथ बारिश, हवा, तापमान में बदलाव और दूसरे प्राकृतिक कारणों से बड़ी-बड़ी चट्टानें धीरे-धीरे टूटने लगीं।

तापमान की वजह से इन चट्टानों के हो जाते हैं छोटे-छोटे कण  Image Credit : IStock03 / 09

तापमान की वजह से इन चट्टानों के हो जाते हैं छोटे-छोटे कण

दिन में तेज गर्मी और रात में तापमान में गिरावट जैसी परिस्थितियां भी चट्टानों को कमजोर करती हैं। चट्टानों में छोटी दरारें बनती हैं और समय के साथ ये दरारें बड़ी होती जाती हैं। आखिरकार चट्टान के छोटे-छोटे टुकड़े हो जाते हैं। यही छोटे टुकड़े आगे चलकर रेत और धूल का रूप ले लेते हैं।

लेकिन इतनी रेत जमा कैसे हुई?Image Credit : IStock04 / 09

लेकिन इतनी रेत जमा कैसे हुई?

अब सवाल आता है कि अगर चट्टानें टूटकर रेत बनती हैं, तो रेगिस्तान में इतनी ज्यादा रेत जमा कैसे हो गई? इस सवाल का जवाब है हवा और पानी। असल में नदियां और बारिश चट्टानों से टूटे छोटे कणों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती हैं।

चट्टानों के कणों को हवा उड़ाकर दूर ले जाती हैImage Credit : IStock05 / 09

चट्टानों के कणों को हवा उड़ाकर दूर ले जाती है

कई बार ये कण लंबे समय तक यात्रा करते हैं और अलग-अलग इलाकों में जमा होते रहते हैं। बाद में जब किसी इलाके में सूखा बढ़ता है और हरियाली लगभग खत्म हो जाती है, तो तेज हवाएं इन छोटे कणों को उठाकर दूर तक ले जाने लगती हैं।

एक जगह इकट्ठा होकर बन जाते हैं रेत के टीलेImage Credit : IStock06 / 09

एक जगह इकट्ठा होकर बन जाते हैं रेत के टीले

हवा रेत को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है और धीरे-धीरे बड़े-बड़े रेत के टीले यानी (Sand Dunes) बन जाते हैं। यही वजह है कि रेगिस्तान में आपको रेत के छोटे नहीं, बल्कि कई बार कई मीटर ऊंचे टीले दिखाई देते हैं।

कभी इन जगहों पर कुछ और थाImage Credit : IStock07 / 09

कभी इन जगहों पर कुछ और था

सबसे दिलचस्प बात यह है कि आज जिन इलाकों को हम रेगिस्तान के नाम से जानते हैं, वे हमेशा से सूखे और बंजर नहीं थे। पृथ्वी की जलवायु समय के साथ लगातार बदलती रही है। कुछ इलाकों में कभी ज्यादा बारिश होती थी, वहां झीलें और नदियां थीं और वनस्पतियां भी मौजूद थीं।

पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन भी एक कारणImage Credit : IStock08 / 09

पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन भी एक कारण

हजारों और लाखों वर्षों में जलवायु में बदलाव आया और कई क्षेत्र धीरे-धीरे ज्यादा सूखे होते चले गए। जैसे-जैसे पानी और पेड़-पौधे कम हुए, मिट्टी और रेत को रोकने वाली प्राकृतिक बाधाएं भी कम होती गईं। फिर हवा ने अपना काम शुरू किया और बड़े-बड़े इलाकों में रेत फैलती चली गई।

हर रेगिस्तान सिर्फ रेत वाला नहीं होताImage Credit : IStock09 / 09

हर रेगिस्तान सिर्फ रेत वाला नहीं होता

यहां एक और दिलचस्प बात है। दुनिया में हर रेगिस्तान ऐसा नहीं है जहां आपको दूर-दूर तक सिर्फ रेत ही दिखाई दे। कुछ रेगिस्तानों में रेत बहुत कम होती है और वहां चट्टानी जमीन, कंकड़ या सूखी मिट्टी ज्यादा दिखाई देती है। यानी रेगिस्तान का मतलब सिर्फ रेत का समंदर ही नहीं होता। किसी इलाके को रेगिस्तान मुख्य रूप से वहां होने वाली बेहद कम बारिश के आधार पर माना जाता है।

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