इस सवाल का सही जवाब जानने के लिए हमें क्रिकेट के इतिहास में झांकना होगा। दरअसल, पहले जब क्रिकेट खेला जाता था तो 1 ओवर में फेंके जाने वाली गेंदों की कोई तय संख्या नहीं थी।
18वीं और 19वीं सदी में अलग-अलग देशों में अलग नियम थे। जहां विभिन्न देशों में 1 ओवर में फेंके जाने वाली गेंदों की संख्या अलग-अलग थी। कहीं पर 1 ओवर में 4 गेंद ही फेंके जाते तो कहीं पर 1 ओवर में 5 या फिर 8 गेंद फेंके जाते थे।
ऐसे में अगर दो देशों के बीच आपस में मैच हो जाते थे तो मैच में काफी भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती थी। इसी समस्या को देखते हुए साल 1979 में ICC (International Cricket Council) ने क्रिकेट के नियमों में एकरूपता लाने का फैसला किया।
जिसके बाद यह तय किया गया कि अब पूरी दुनिया में खेले जाने वाले क्रिकेट मैचों के दौरान अब 1 ओवर में 6 गेंद ही फेंकनी होगी ताकि हर जगह क्रिकेट एक जैसा ही खेला जाए और किसी दुविधा की स्थिति ना बने।
1 ओवर में 6 गेंद डालने का ही नियम इसलिए बनाया गया क्योंकि इससे मैच बहुत लंबा नहीं खिंचता था। इसके अलावा मैच के दौरान गेंदबाजों को आराम भी मिल जाता था और साथ ही बल्लेबाजों को खेलने का मौका भी मिलता है।
6 गेंदों का एक ओवर बिल्कुल परफेक्ट बैलेंस माना गया, और इनमें सबसे बड़ी बात यह थी कि क्रिकेट के इन नियमों की वजह से मैच दिलचस्प होता था और इसे देखने या सुनने वाले दर्शक या श्रोताओं को मजा आने लगा।
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि पहले ऑस्ट्रेलिया में खेले जाने वाले क्रिकेट मैच में 8 गेंद का एक ओवर होता था। वहीं, इंग्लैंड में 6 गेंद का 1 ओवर माना जाता था, जबकि साउथ अफ्रीका में 5 गेंद का ही एक ओवर मानकर खेला जाता था। लेकिन बाद में ICC के नियम के तहत सभी देशों ने 6 गेंद को ही एक ओवर मान लिया।