वंदे भारत के इस दौर में भारत में एक ट्रेन ऐसी भी है, जिसमें यात्री नहीं बैठते। इस ट्रेन का इस्तेमाल पिछले 145 सालों से सिर्फ एक खास काम के लिए हो रहा है। यह ट्रेन राजस्थान के सांभर झील से होकर गुजरती है और यह भारत की सबसे अनोखी इस ट्रेनों में एक है। जिसे अंग्रेजों ने शुरू किया था।
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह ट्रेन पिछले 145 सालों से सिर्फ एक ही काम कर रही है और वह है सिर्फ नमक ढोने का काम। इसके अलावा यह ट्रेन ना तो कोई सवारी ढोती है और ना ही कोई दूसरा माल। इस ट्रेन को सिर्फ नमक ढोने के लिए ही रखा गया है। यह ट्रेन राजस्थान में चलती है।
भारत की यह अनोखी ट्रेन राजस्थान की सांभर साल्ट ट्रेन है। जो भारतीय रेलवे की सबसे अनोखी ट्रेनों में गिनी जाती है। खास बात यह है कि इस ट्रेन में आम लोग सफर नहीं कर सकते। इसका एकमात्र काम सांभर झील में तैयार होने वाले नमक को उत्पादन स्थल से स्टोरेज तक पहुंचाना है।
राजस्थान के जयपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित सांभर झील देश की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। यहां सदियों से बड़े पैमाने पर नमक बनाया जाता है। आज भी इस झील से लाखों टन नमक तैयार होता है, जिसे अलग-अलग जगहों तक पहुंचाने के लिए इस ट्रेन का इस्तेमाल किया जाता है।
19वीं सदी में जब अंग्रेजों ने सांभर झील के नमक उत्पादन का जिम्मा अपने हाथ में लिया, तब सबसे बड़ी चुनौती नमक को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की थी। झील के आसपास की जमीन दलदली और मुलायम थी, इसलिए सड़क बनाना आसान नहीं था।
इस समस्या का समाधान निकालने के लिए 1876 में ब्रिटिश सरकार ने यहां मीटर गेज और नैरो गेज रेलवे लाइन बिछाई। उसी समय इस खास ट्रेन की शुरुआत हुई। हैरानी की बात यह है कि करीब डेढ़ सदी बाद भी यह ट्रेन उसी काम के लिए इस्तेमाल की जा रही है।
शुरुआत में इस ट्रेन को स्टीम इंजन खींचते थे। बाद में उनकी जगह डीजल इंजन ने ले ली लेकिन आज भी इसमें इस्तेमाल होने वाले इंजन करीब 50 से 60 साल पुराने बताए जाते हैं। ट्रेन के कई डिब्बे भी लकड़ी और लोहे से बने हुए हैं, जो देखने में किसी चलती-फिरती विरासत से कम नहीं लगते। आधुनिक ट्रेनों के बीच यह ट्रेन आज भी अपने पुराने अंदाज में काम करती नजर आती है।
यह ट्रेन यात्रियों के लिए नहीं बनाई गई है। इसका इस्तेमाल केवल नमक ढुलाई के लिए होता है इसलिए आम लोगों को इसमें यात्रा करने की अनुमति नहीं है। ट्रेन सीधे नमक की क्यारियों से तैयार नमक को स्टोरेज बैंक तक पहुंचाती है। यही वजह है कि इसे भारत की सबसे अलग और अनोखी मालगाड़ी माना जाता है।