भारत की वह अनोखी ट्रेन, जिसमें न यात्री, न टिकट फिर भी हर दिन दौड़ती है यह रेलगाड़ी, 145 साल से सिर्फ नमक ढोने का है जिम्मा

भारत में जब भी ट्रेनों की बात होती है तो सबसे पहले वंदे भारत, राजधानी, शताब्दी या बुलेट ट्रेन जैसे नाम याद आते हैं। ये ट्रेनें अपनी तेज रफ्तार और अपनी सुख-सुविधाओं के लिए जानी जाती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसी भी ट्रेन है, जो यात्रियों को ढोने के बजाय किसी और काम के लिए इस्तेमाल होती है।

Authored by: पंकज यादवUpdated Jul 6 2026, 14:22 IST
​145 साल से हर रोज चल रही है यह ट्रेनImage Credit : IStock01 / 08

​145 साल से हर रोज चल रही है यह ट्रेन

वंदे भारत के इस दौर में भारत में एक ट्रेन ऐसी भी है, जिसमें यात्री नहीं बैठते। इस ट्रेन का इस्तेमाल पिछले 145 सालों से सिर्फ एक खास काम के लिए हो रहा है। यह ट्रेन राजस्थान के सांभर झील से होकर गुजरती है और यह भारत की सबसे अनोखी इस ट्रेनों में एक है। जिसे अंग्रेजों ने शुरू किया था।

145 साल से सिर्फ एक ही काम करती है यह ट्रेनImage Credit : IStock02 / 08

145 साल से सिर्फ एक ही काम करती है यह ट्रेन

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह ट्रेन पिछले 145 सालों से सिर्फ एक ही काम कर रही है और वह है सिर्फ नमक ढोने का काम। इसके अलावा यह ट्रेन ना तो कोई सवारी ढोती है और ना ही कोई दूसरा माल। इस ट्रेन को सिर्फ नमक ढोने के लिए ही रखा गया है। यह ट्रेन राजस्थान में चलती है।

क्या है इस ट्रेन का काम?Image Credit : IStock03 / 08

क्या है इस ट्रेन का काम?

भारत की यह अनोखी ट्रेन राजस्थान की सांभर साल्ट ट्रेन है। जो भारतीय रेलवे की सबसे अनोखी ट्रेनों में गिनी जाती है। खास बात यह है कि इस ट्रेन में आम लोग सफर नहीं कर सकते। इसका एकमात्र काम सांभर झील में तैयार होने वाले नमक को उत्पादन स्थल से स्टोरेज तक पहुंचाना है।

भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झीलImage Credit : IStock04 / 08

भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील

राजस्थान के जयपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित सांभर झील देश की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। यहां सदियों से बड़े पैमाने पर नमक बनाया जाता है। आज भी इस झील से लाखों टन नमक तैयार होता है, जिसे अलग-अलग जगहों तक पहुंचाने के लिए इस ट्रेन का इस्तेमाल किया जाता है।

अंग्रेजों ने शुरू की थी यह ट्रेन?Image Credit : IStock05 / 08

अंग्रेजों ने शुरू की थी यह ट्रेन?

19वीं सदी में जब अंग्रेजों ने सांभर झील के नमक उत्पादन का जिम्मा अपने हाथ में लिया, तब सबसे बड़ी चुनौती नमक को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की थी। झील के आसपास की जमीन दलदली और मुलायम थी, इसलिए सड़क बनाना आसान नहीं था।

अंग्रेजों ने क्यों शुरू की थी यह ट्रेन?Image Credit : IStock06 / 08

अंग्रेजों ने क्यों शुरू की थी यह ट्रेन?

इस समस्या का समाधान निकालने के लिए 1876 में ब्रिटिश सरकार ने यहां मीटर गेज और नैरो गेज रेलवे लाइन बिछाई। उसी समय इस खास ट्रेन की शुरुआत हुई। हैरानी की बात यह है कि करीब डेढ़ सदी बाद भी यह ट्रेन उसी काम के लिए इस्तेमाल की जा रही है।

आज भी पुराने इंजन और डिब्बों का इस्तेमालImage Credit : IStock07 / 08

आज भी पुराने इंजन और डिब्बों का इस्तेमाल

शुरुआत में इस ट्रेन को स्टीम इंजन खींचते थे। बाद में उनकी जगह डीजल इंजन ने ले ली लेकिन आज भी इसमें इस्तेमाल होने वाले इंजन करीब 50 से 60 साल पुराने बताए जाते हैं। ट्रेन के कई डिब्बे भी लकड़ी और लोहे से बने हुए हैं, जो देखने में किसी चलती-फिरती विरासत से कम नहीं लगते। आधुनिक ट्रेनों के बीच यह ट्रेन आज भी अपने पुराने अंदाज में काम करती नजर आती है।

इसमें सफर करना क्यों मना है?Image Credit : IStock08 / 08

इसमें सफर करना क्यों मना है?

यह ट्रेन यात्रियों के लिए नहीं बनाई गई है। इसका इस्तेमाल केवल नमक ढुलाई के लिए होता है इसलिए आम लोगों को इसमें यात्रा करने की अनुमति नहीं है। ट्रेन सीधे नमक की क्यारियों से तैयार नमक को स्टोरेज बैंक तक पहुंचाती है। यही वजह है कि इसे भारत की सबसे अलग और अनोखी मालगाड़ी माना जाता है।

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