एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्रालय यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (यूएलआई) नामक एक नई डिजिटल लोन व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
ULI सिस्टम पारंपरिक क्रेडिट स्कोर की बजाय उपभोक्ताओं के व्यवहारिक डेटा का उपयोग करेगी। इसमें बिजली-पानी के बिलों के भुगतान, GST रिटर्न और अन्य डिजिटल ट्रांजैक्शन के डेटा के आधार पर लोन की योग्यता तय की जाएगी। इससे उन लोगों को भी लोन मिल सकेगा जिनका कोई क्रेडिट इतिहास नहीं है। (फोटो सोर्स-istock)
नई व्यवस्था खासतौर से उन वर्गों के लिए फायदेमंद होगी जो पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से बाहर हैं- जैसे कि रेहड़ी-पटरी वाले, छोटे दुकानदार, किसान और घरेलू श्रमिक। जिनके पास CIBIL स्कोर नहीं होता, लेकिन वे समय पर बिल चुकाते हैं-ULI उनके लिए लोन के दरवाजे खोलेगा। (फोटो सोर्स-istock)
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, ULI प्रणाली को वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाले वित्तीय सेवा विभाग (DFS) की निगरानी में तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोन की प्रक्रिया को पारदर्शी, तकनीक-आधारित और समावेशी बनाना है, जिससे बैंकिंग प्रणाली का दायरा बढ़े। (फोटो सोर्स-istock)
ULI के देशव्यापी रोलआउट को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और अन्य संबंधित विभागों ने मिलकर रणनीति तैयार की है। बैंकों और एनबीएफसी कंपनियों को इस प्रणाली को जल्द से जल्द अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। जिन संस्थानों ने अब तक इसे लागू नहीं किया है, उन्हें जल्द से जल्द जुड़ने के लिए कहा गया है। (फोटो सोर्स-istock)
ULI प्रणाली में उपयोगकर्ता की सहमति के बिना कोई डेटा साझा नहीं किया जाएगा। सरकार इसे पूरी तरह डेटा गोपनीयता के नियमों के तहत संचालित करेगी। इससे आम लोगों का भरोसा बढ़ेगा और डिजिटल लेंडिंग में पारदर्शिता आएगी। (फोटो सोर्स-istock)
इस प्रणाली की तकनीक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि सभी लेंडर्स (बैंक और एनबीएफसी) एक ही प्लेटफॉर्म पर जुड़ सकें। इससे लोन की प्रक्रिया तेज होगी, लागत घटेगी और कागजी काम कम होगा। खास बात यह है कि उधार देने वाले संस्थान भी जोखिम का बेहतर आकलन कर सकेंगे. (फोटो सोर्स-istock)