दरअसल, रेलवे हर ट्रेन में तत्काल कोटा के तहत सीमित सीटें ही उपलब्ध कराता है। अलग-अलग कोच के हिसाब से सीटों की संख्या तय होती है। उदाहरण के तौर पर 3AC में करीब 16 बर्थ, 2AC में लगभग 10 बर्थ और स्लीपर क्लास में करीब 20 सीटें तत्काल कोटे में रखी जाती हैं। ऐसे में जब लाखों यात्री एक साथ टिकट बुक करने की कोशिश करते हैं तो सीटें तेजी से भर जाती हैं।
तत्काल टिकट बुकिंग का समय भी इसकी सबसे बड़ी वजह माना जाता है। AC क्लास की बुकिंग सुबह 10 बजे और स्लीपर क्लास की बुकिंग सुबह 11 बजे शुरू होती है।
जैसे ही बुकिंग विंडो खुलती है, लाखों लोग एक साथ IRCTC प्लेटफॉर्म पर लॉगिन कर टिकट बुक करने लगते हैं। इससे सर्वर पर अचानक भारी दबाव पड़ता है और कई बार यूजर्स को “Server Busy” या “Payment Failed” जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
दिल्ली, मुंबई, बिहार, यूपी और बंगाल जैसे राज्यों के रूट्स पर तत्काल टिकट की मांग सबसे ज्यादा रहती है। खासकर त्योहारों और छुट्टियों के मौसम में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। यात्रियों की संख्या बढ़ने के कारण टिकट कुछ ही सेकंड में वेटिंग तक पहुंच जाते हैं।
रेलवे के अनुसार तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान पहले से तैयारी करना बेहद जरूरी है। यात्रियों को बुकिंग शुरू होने से पहले IRCTC अकाउंट में लॉगिन कर लेना चाहिए। इसके अलावा मास्टर लिस्ट बनाकर यात्री विवरण पहले से सेव रखना और फास्ट पेमेंट विकल्प तैयार रखना टिकट जल्दी बुक करने में मदद कर सकता है।
भारतीय रेलवे लगातार अपने रिजर्वेशन सिस्टम को अपग्रेड कर रहा है। रेलवे का दावा है कि नए फास्ट सर्वर, बेहतर पेमेंट सिस्टम और सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी की मदद से टिकट बुकिंग प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्यादा तेज और सुरक्षित हुई है। हालांकि बढ़ती डिमांड के सामने सीमित सीटें आज भी यात्रियों की सबसे बड़ी परेशानी बनी हुई हैं।