प्रोपेन एक हाइड्रोकार्बन गैस है, जो रंगहीन होती है और इसे आसानी से तरल रूप में बदला जा सकता है। इसका रासायनिक फॉर्मूला C3H8 है। आमतौर पर इसे गैस ग्रिल में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। प्राकृतिक रूप से प्रोपेन में कोई गंध नहीं होती, इसलिए गैस लीक का पता लगाने के लिए इसमें एक विशेष गंध मिलाई जाती है।
प्रोपेन को एक साफ जलने वाला ईंधन माना जाता है। इसके इस्तेमाल से मिट्टी, सतही पानी या भूजल को नुकसान नहीं पहुंचता। यही वजह है कि पर्यावरण को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच इसे ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत के रूप में देखा जा रहा है।
मौजूदा एयर कंडीशनर में इस्तेमाल होने वाली HCFC-22 गैस ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाली मानी जाती है। कई देशों में इसके उत्पादन और इस्तेमाल को धीरे-धीरे कम किया जा रहा है। इसी कारण वैज्ञानिक और कंपनियां ऐसी गैसों की तलाश कर रही हैं जो पर्यावरण के लिए कम नुकसानदायक हों। प्रोपेन इसी दिशा में एक संभावित विकल्प के रूप मे सामने आया है।
घर के उपकरणों में आमतौर पर गैस प्रोपेन की जगह लिक्विड प्रोपेन या LPG का इस्तेमाल किया जाता है। यह प्रोपेन, ब्यूटेन और अन्य गैसों के मिश्रण से तैयार होता है। लिक्विड प्रोपेन का इस्तेमाल लंबे समय से हीटिंग सिस्टम, गैस फायरप्लेस, गैस चूल्हे और ओवन में किया जाता रहा है। यह साफ जलने वाला ईंधन है और इसे लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है।
आज कई घरेलू उपकरण जैसे कपड़े सुखाने वाली मशीन और कुछ रेफ्रिजरेटर भी LPG से चलते हैं। इसी वजह से यह सवाल उठने लगा है कि क्या प्रोपेन का इस्तेमाल पूरे घर को ठंडा रखने वाले एयर कंडीशनर में किया जा सकता है।
वैज्ञानिक शोध के अनुसार, प्रोपेन कूलिंग सिस्टम के लिए पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प हो सकता है। यह कम प्रदूषण पैदा करता है और ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाली गैसों का बेहतर विकल्प माना जा सकता है, हालांकि प्रोपेन को एयर कंडीशनर में इस्तेमाल करने को लेकर अभी कई देशों में सख्त नियम हैं। अमेरिका और यूरोप में घरेलू एसी सिस्टम में इसके इस्तेमाल को मंजूरी नहीं है।
प्रोपेन की सबसे बड़ी समस्या इसकी ज्वलनशीलता है। यह आसानी से आग पकड़ सकता है, इसलिए इसे घर के अंदर बड़े कूलिंग सिस्टम में इस्तेमाल करना सुरक्षा के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यही कारण है कि पर्यावरण के लिए बेहतर होने के बावजूद प्रोपेन एयर कंडीशनर अभी बड़े पैमाने पर बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। भविष्य में बेहतर सुरक्षा तकनीक आने के बाद इसका इस्तेमाल बढ़ सकता है।
इनमें बिजली की खपत कम हो सकती है, लेकिन ये सामान्य घरेलू एसी से अलग सिस्टम होते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रोपेन खुद बिजली नहीं बनाता, बल्कि यह एक ईंधन या कूलिंग माध्यम के रूप में काम करता है। घरेलू प्रोपेन एसी को बड़े स्तर पर अपनाने में सबसे बड़ी चुनौती इसकी ज्वलनशीलता और सुरक्षा है।
प्रोपेन टेक्नोलॉजी के तहत दो तरह के एयर कंडीशनर आते हैं। अगर प्रोपेन का इस्तेमाल सिर्फ कूलिंग गैस (रेफ्रिजरेंट) के रूप में किया जाता है, तो एसी का कंप्रेसर, पंखा और कंट्रोल सिस्टम चलाने के लिए बिजली की जरूरत होगी यानी यह सामान्य एसी की तरह ही बिजली से चलेगा, बस इसमें इस्तेमाल होने वाली गैस अलग होगी। वहीं कुछ प्रोपेन आधारित कूलिंग सिस्टम ऐसे भी हो सकते हैं जो गैस से चलने वाली हीट-ड्रिवन तकनीक का इस्तेमाल करें।