संशोधित नियमों के मुताबिक अब यात्री अपनी मर्जी से कैब ड्राइवर को टिप दे सकते हैं, हालांकि यह विकल्प सिर्फ यात्रा पूरी होने के बाद ही दिखाई देगा। बुकिंग के समय, यात्रा शुरू होने से पहले या सफर के दौरान टिप देने का कोई विकल्प नहीं होगा।
सरकार ने साफ किया है कि टिप की पूरी राशि सीधे ड्राइवर के खाते में जाएगी और एग्रीगेटर कंपनी इसमें से कोई कटौती नहीं कर सकेगी। साथ ही टिप से जुड़ा कोई भी फीचर भ्रामक या उपभोक्ता संरक्षण कानून, 2019 के खिलाफ नहीं होना चाहिए।
यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक अहम बदलाव किया गया है। अब जहां यह सुविधा उपलब्ध होगी, वहां यात्री अपने ही जेंडर का ड्राइवर चुन सकेंगे। खासतौर पर महिला यात्रियों को महिला ड्राइवर चुनने का विकल्प मिलेगा जिससे सुरक्षित यात्रा को बढ़ावा मिलेगा।
मोटर वाहन एग्रीगेटर गाइडलाइंस, 2025 को पहली बार 1 जुलाई 2025 को अधिसूचित किया गया था। इसमें किराए को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। एग्रीगेटर कंपनियां राज्य द्वारा तय बेस फेयर से 50% तक कम किराया ले सकती हैं, लेकिन पीक आवर्स में किराया अधिकतम बेस फेयर का सिर्फ दोगुना ही हो सकता है। इससे मनमानी सर्ज प्राइसिंग पर रोक लगेगी।
नियमों के अनुसार, ड्राइवर को ऐप में दिखाए गए रूट का ही पालन करना होगा। अगर ड्राइवर रास्ता बदलता है तो एप के जरिए कंट्रोल रूम को तुरंत सिग्नल जाएगा। इसके बाद कंट्रोल रूम ड्राइवर और यात्री दोनों से संपर्क करेगा, ताकि किसी भी तरह की समस्या को तुरंत सुलझाया जा सके।
नई गाइडलाइंस में कैंसिलेशन को लेकर भी सख्ती की गई है। अगर ड्राइवर बिना किसी वैध कारण के बुकिंग स्वीकार करने के बाद कैंसिल करता है, तो उस पर किराए का 10% जुर्माना लगेगा, जो अधिकतम ₹100 तक होगा।
वहीं, अगर यात्री बिना वैध कारण के बुकिंग कैंसिल करता है, तो उससे भी किराए का 10% (अधिकतम ₹100) शुल्क लिया जाएगा। यह राशि ड्राइवर और एग्रीगेटर के बीच तय अनुपात में बांटी जाएगी।
नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि अगर एग्रीगेटर नियमों का उल्लंघन करता है, तो सक्षम प्राधिकरण उसकी जांच के बाद लाइसेंस सस्पेंड कर सकता है। यह निलंबन अवधि तीन महीने तक की हो सकती है।