भारतीय रेलवे का ‘10 PM Rule’: रात में Train के सफर में कौन-से काम नहीं कर सकते आप

अगर आप भी ट्रेन (Train) से सफर करते हैं तो ये जानकारी आपके लिए बेहद काम की साबित हो सकती है। क्या आप जानते हैं ट्रेन में रात का सफर आरामदायक और शांत बना रहे, इसके लिए भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने रात 10 बजे के बाद कुछ खास नियम बनाए हैं। इन नियमों का उद्देश्य यात्रियों को बिना परेशानी आराम करने का मौका देना है। रात के समय तेज आवाज, अनावश्यक बातचीत और सीट को लेकर विवाद से बचने के लिए रेलवे ने कई निर्देश तय किए हैं, जिनका पालन सभी यात्रियों को करना चाहिए। आइए जानते हैं ट्रेन में रात 10 बजे के बाद कौन-से काम नहीं किए जा सकते हैं-

Authored by: शिवानी कोटनालाUpdated May 11 2026, 13:14 IST
रात 10 बजे के बाद ट्रेन में तेज आवाज में गाने सुनना या फोन को लाउडस्पीकर पर इस्तेमाल करना मना होता है। यात्रियों को ध्यान रखना चाहिए कि उनकी वजह से दूसरे लोगों की नींद खराब न हो। रेलवे रात के समय शांति बनाए रखने पर खास जोर देता है।Image Credit : IStock01 / 07

रात 10 बजे के बाद ट्रेन में तेज आवाज में गाने सुनना या फोन को लाउडस्पीकर पर इस्तेमाल करना मना होता है। यात्रियों को ध्यान रखना चाहिए कि उनकी वजह से दूसरे लोगों की नींद खराब न हो। रेलवे रात के समय शांति बनाए रखने पर खास जोर देता है।

10 बजे के बाद ट्रेन के कोच की मुख्य लाइट्स बंद कर दी जाती हैं और केवल नाइट लाइट जलती रहती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि यात्री आराम से सो सकें। अगर किसी यात्री को काम करना हो, तो उसे दूसरे यात्रियों को परेशान किए बिना करना चाहिए।Image Credit : IStock02 / 07

10 बजे के बाद ट्रेन के कोच की मुख्य लाइट्स बंद कर दी जाती हैं और केवल नाइट लाइट जलती रहती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि यात्री आराम से सो सकें। अगर किसी यात्री को काम करना हो, तो उसे दूसरे यात्रियों को परेशान किए बिना करना चाहिए।

रेलवे के नियमों के अनुसार रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक सोने का समय माना जाता है। इसी दौरान मिडिल बर्थ खोलने की अनुमति होती है। दिन में नीचे वाली सीट पर बैठने वाले यात्रियों को रात में मिडिल बर्थ खोलने से नहीं रोका जा सकता।Image Credit : IStock03 / 07

रेलवे के नियमों के अनुसार रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक सोने का समय माना जाता है। इसी दौरान मिडिल बर्थ खोलने की अनुमति होती है। दिन में नीचे वाली सीट पर बैठने वाले यात्रियों को रात में मिडिल बर्थ खोलने से नहीं रोका जा सकता।

रात के समय कोई यात्री दूसरे यात्री को सीट फोल्ड करने या बैठने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। अगर किसी की बर्थ रिजर्व है, तो उसे आराम करने का पूरा अधिकार होता है। रेलवे ने ऐसे विवादों से बचने के लिए यह नियम बनाए हैं।Image Credit : IStock04 / 07

रात के समय कोई यात्री दूसरे यात्री को सीट फोल्ड करने या बैठने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। अगर किसी की बर्थ रिजर्व है, तो उसे आराम करने का पूरा अधिकार होता है। रेलवे ने ऐसे विवादों से बचने के लिए यह नियम बनाए हैं।

भारतीय रेलवे के अनुसार रात 10 बजे के बाद यात्रियों को आपस में ज्यादा बातचीत करने से भी बचना चाहिए। तेज आवाज में बातचीत या हंसी-मजाक दूसरे यात्रियों की नींद में बाधा बन सकता है। इसलिए रात के समय शांत माहौल बनाए रखना जरूरी माना जाता है।Image Credit : IStock05 / 07

भारतीय रेलवे के अनुसार रात 10 बजे के बाद यात्रियों को आपस में ज्यादा बातचीत करने से भी बचना चाहिए। तेज आवाज में बातचीत या हंसी-मजाक दूसरे यात्रियों की नींद में बाधा बन सकता है। इसलिए रात के समय शांत माहौल बनाए रखना जरूरी माना जाता है।

रात 10 बजे के बाद आमतौर पर TTE भी यात्रियों को टिकट दिखाने के लिए परेशान नहीं करते। टिकट जांच का काम ज्यादातर रात से पहले पूरा करने की कोशिश की जाती है, ताकि यात्रियों की नींद खराब न हो। हालांकि, अगर किसी का सफर देर रात से ही शुरू होता है तो TTE को उसका काम करने से नहीं रोका जा सकता है।Image Credit : IStock06 / 07

रात 10 बजे के बाद आमतौर पर TTE भी यात्रियों को टिकट दिखाने के लिए परेशान नहीं करते। टिकट जांच का काम ज्यादातर रात से पहले पूरा करने की कोशिश की जाती है, ताकि यात्रियों की नींद खराब न हो। हालांकि, अगर किसी का सफर देर रात से ही शुरू होता है तो TTE को उसका काम करने से नहीं रोका जा सकता है।

अगर यात्री ट्रेन में खाना ऑर्डर करना चाहते हैं तो उन्हें कोशिश करनी चाहिए कि डिलीवरी रात 10 बजे से पहले हो जाए। देर रात खाने की डिलीवरी या आवाजाही से दूसरे यात्रियों को परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि रेलवे रात के समय शांत और आरामदायक माहौल बनाए रखने पर जोर देता है।Image Credit : IStock07 / 07

अगर यात्री ट्रेन में खाना ऑर्डर करना चाहते हैं तो उन्हें कोशिश करनी चाहिए कि डिलीवरी रात 10 बजे से पहले हो जाए। देर रात खाने की डिलीवरी या आवाजाही से दूसरे यात्रियों को परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि रेलवे रात के समय शांत और आरामदायक माहौल बनाए रखने पर जोर देता है।

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