सोना खरीदते समय सबसे जरूरी है उसकी शुद्धता की जांच करना। सरकार ने अब 380 जिलों में गोल्ड हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी है। ज्वैलरी पर BIS का निशान और 6 अंकों का HUID नंबर होना जरूरी है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि आपको असली और शुद्ध सोना ही मिल रहा है। हालांकि, कुछ मामलों में नकली हॉलमार्क भी सामने आ चुके हैं, इसलिए सावधानी बरतना बहुत जरूरी है।
आप BIS Care App के जरिए HUID नंबर डालकर ज्वैलरी की असली जानकारी तुरंत देख सकते हैं। सोने की शुद्धता 916 (22 कैरेट) और 750 (18 कैरेट) जैसी संख्या से बताई जाती है। अगर आपको शक है तो आप BIS लैब में ज्वैलरी की जांच भी करवा सकते हैं। इसकी फीस लगभग 200 रुपये होती है। इससे आपको खरीदे गए सोने की शुद्धता का भरोसा मिलता है।
सोना खरीदते समय हमेशा पक्का बिल लें। बिल में वजन, कीमत, मेकिंग चार्ज और HUID नंबर जैसी पूरी जानकारी होना जरूरी है। यह बाद में किसी विवाद या समस्या से बचने में मदद करता है। बिना बिल के खरीदा गया सोना भविष्य में परेशानी का कारण बन सकता है।
आजकल ज्वैलर्स कई बार मेकिंग चार्ज पर ऑफर देते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि कभी-कभी इसमें छिपे हुए खर्च भी शामिल होते हैं। इसलिए पूरी कीमत समझकर ही सोना खरीदें। सोने पर 3% GST और मेकिंग चार्ज पर 5% GST लगता है। सही जानकारी लेने से आप अनावश्यक खर्च से बच सकते हैं।
अगर सोना महंगा लग रहा है तो हल्के डिजाइन या कम कैरेट की ज्वैलरी खरीदना एक अच्छा विकल्प है। इसके अलावा, पुराने गहनों को एक्सचेंज करके नई ज्वैलरी लेना भी फायदे का सौदा हो सकता है। इससे कम खर्च में नया डिजाइन भी मिल जाता है और निवेश भी सुरक्षित रहता है।
सोना खरीदते समय टैक्स नियमों को समझना भी जरूरी है। फिजिकल गोल्ड को 2 साल बाद बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। जबकि गोल्ड ETF या म्यूचुअल फंड में यह अवधि केवल 1 साल है। लॉन्ग टर्म गेन पर 12.5% टैक्स लगता है। निवेश करते समय इन नियमों का ध्यान रखना फायदेमंद रहता है।
अगर आप फिजिकल ज्वैलरी नहीं लेना चाहते तो पेपर गोल्ड भी एक विकल्प है। इसके लिए आप गोल्ड ETF या गोल्ड म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। इसमें सोना स्टोर करने की चिंता नहीं रहती और यह बाजार के उतार-चढ़ाव से भी आपको बचाव देता है।