95 रुपये का Brahmos सॉफ्टवेयर, 15 सेकेंड में बुक कर देता है तत्काल टिकट, RPF का बड़ा खुलासा

IRCTC TRAIN TICKET SCAM: भारत में सबसे ज्यादा लोग रेलवे से सफर करते हैं और इसके लिए लोग IRCTC से ट्रेन टिकट की बुकिंग करते हैं, लेकिन लाख इंतजाम के बाद भी रेलवे टिकट पर दलालों का ही कब्जा रहता है। आम आदमी टिकट बुक ही नहीं कर पाता है, खासतौर पर जब तत्काल टिकट का मामला हो। जब लॉन्ग-डिस्टेंस ट्रेनों के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग की विंडो सुबह 8 बजे खुलती है, तो कुछ अनधिकृत सॉफ्टवेयर जैसे कि Brahmos, Tesla, Avengers और Dr Doom, सिर्फ 15 सेकंड में सभी जरूरी विवरण भरकर टिकट बुक कर लेते हैं।

Authored by: प्रदीप पाण्डेयUpdated Nov 12 2025, 12:20 IST
इससे हजारों आम यात्री टिकट पाने से वंचित रह जाते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन सॉफ्टवेयर की कीमत महज 95 रुपये है। इन सॉफ्टवेयर की बिक्री एक वेबसाइट के जरिए हो रही है जहां पर Brahmos को 95 रुपये, Avengers को 800 रुपये और Tesla X को 3,000 रुपये में लिस्ट किया गया है जहां से कोई भी खरीद सकता है।Image Credit : Tatkalticketsoftware01 / 07

इससे हजारों आम यात्री टिकट पाने से वंचित रह जाते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन सॉफ्टवेयर की कीमत महज 95 रुपये है। इन सॉफ्टवेयर की बिक्री एक वेबसाइट के जरिए हो रही है जहां पर Brahmos को 95 रुपये, Avengers को 800 रुपये और Tesla X को 3,000 रुपये में लिस्ट किया गया है जहां से कोई भी खरीद सकता है।

​ये सॉफ्टवेयर डेवलपर्स द्वारा “ट्रेंडी नाम” देकर बनाए जाते हैं ताकि इन्हें आसानी से याद रखा जा सके। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) अब इंटर-स्टेट गैंग्स पर कार्रवाई कर रहा है, जिनमें डेवलपर्स, ऑनलाइन एडमिन, “सुपर सेलर्स” और टिकट तश्कर शामिल हैं।​Image Credit : Canva02 / 07

​ये सॉफ्टवेयर डेवलपर्स द्वारा “ट्रेंडी नाम” देकर बनाए जाते हैं ताकि इन्हें आसानी से याद रखा जा सके। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) अब इंटर-स्टेट गैंग्स पर कार्रवाई कर रहा है, जिनमें डेवलपर्स, ऑनलाइन एडमिन, “सुपर सेलर्स” और टिकट तश्कर शामिल हैं।​

सॉफ्टवेयर कैसे काम करता हैImage Credit : Canva03 / 07

सॉफ्टवेयर कैसे काम करता है

​एक अधिकारी ने बताया कि बुकिंग से एक दिन पहले, टिकट पाने वाला यात्री अपना नाम और उम्र टिकट तस्कर को देता है, जो इन सुपर सेलर्स के नेटवर्क में शामिल होता है। सुबह 8 बजे ये सॉफ्टवेयर सिस्टम सक्रिय हो जाते हैं। यह समानांतर (parallel) प्रोसेसिंग करता है, जबकि सामान्य व्यक्ति टिकट बुक करते समय क्रमिक (linear) प्रक्रिया अपनाता है।​

​“एक व्यक्ति को सामान्य रूप से विवरण भरना, OTP प्राप्त करना और Captcha कोड भरना पड़ता है। सॉफ्टवेयर में ये सारी जानकारी पहले से अपलोड रहती है। OTP और Captcha को एक साथ भरकर टिकट 10-15 सेकंड में बुक हो जाती है, जबकि मैनुअल प्रोसेस में अधिक समय लगता है।”​Image Credit : Canva04 / 07

​“एक व्यक्ति को सामान्य रूप से विवरण भरना, OTP प्राप्त करना और Captcha कोड भरना पड़ता है। सॉफ्टवेयर में ये सारी जानकारी पहले से अपलोड रहती है। OTP और Captcha को एक साथ भरकर टिकट 10-15 सेकंड में बुक हो जाती है, जबकि मैनुअल प्रोसेस में अधिक समय लगता है।”​

​टिकट सॉफ्टवेयर और कीमतें​Image Credit : Tatkalticketsoftware05 / 07

​टिकट सॉफ्टवेयर और कीमतें​

​Tesla: पिछले छह महीनों से सक्रिय है और इसकी कीमत 3,000 रुपये है, वहीं Brahmos: पिछले महीने लॉन्च हुआ है और इसे प्रति PNR 99 रुपये में खरीदा जा सकता है। Avengers, Dr Doom, SpaceX की कीमतें भी साइट पर दी गई हैं। सुपर सेलर्स इन सॉफ्टवेयर सिस्टम को ₹1,500-₹2,500 प्रति माह में बेचते हैं, जिसमें टिकट की कोई लिमिट नहीं होती।​

​टिकट की बिक्री में मुनाफा बेहद अधिक होता है। उदाहरण के लिए, ₹800 का स्लीपर PNR तस्करों द्वारा ₹2,000 में बेचा जाता है। त्योहारी सीज़न में यह कीमत और भी बढ़ जाती है। तीसरे AC की टिकट, जो ₹2,300 की है, त्योहारों में ₹4,000 तक पहुंच सकती है।​Image Credit : Canva06 / 07

​टिकट की बिक्री में मुनाफा बेहद अधिक होता है। उदाहरण के लिए, ₹800 का स्लीपर PNR तस्करों द्वारा ₹2,000 में बेचा जाता है। त्योहारी सीज़न में यह कीमत और भी बढ़ जाती है। तीसरे AC की टिकट, जो ₹2,300 की है, त्योहारों में ₹4,000 तक पहुंच सकती है।​

​रेलवे की कार्रवाई​Image Credit : Canva07 / 07

​रेलवे की कार्रवाई​

​रेलवे ने इस समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। भुगतान केवल 8:00:35 बजे से शुरू होना। टिकट बुकिंग के लिए आधार-verified IDs अनिवार्य करना। आधार वेरिफिकेशन के बाद ब्लैक मार्केट में IDs की कीमत ₹30 से बढ़कर ₹500 हो गई है। RPF की IT सेल ने इस साल 10 मामले और पिछले साल 25-30 मामले दर्ज किए। अब तक लगभग 50 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें सुपर सेलर्स, तस्कर और डेवलपर्स शामिल हैं।​

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