भारत में सबसे पहले किस शहर में नल से पहुंचा था जल; 140 साल पहले ऐसा देख डर जाते थे लोग

भारत सबसे साफ शहर इन दिनों खराब पानी के लिए चर्चा में है। और हो भी क्यों ना यहां पाइपलाइन से आने वाला दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई है। इन मरने वालों में 75 साल के वृद्ध से लेकर पांच माह का नवजात भी शामिल है। स्वच्छता सर्वेक्षण में हर साल टॉप पर रहने वाले इस शहर में करीब 120 साल पहले पाइपलाइन बिछाई गई थी। ऐसा कई रिपोर्ट्स और प्रमाणिक स्त्रोतों में दावा किया गया है। लेकिन क्या कभी आपने सोंचा है कि भारत का वो कौन शा शहर था जहां सबसे पहले पाइपलाइन बिछाकर घर में ही जल की व्यवस्था कराई गई थी और यह क्रांतिकारी कदम क्यों उठाया गया था। आज हम आपको उसी शहर के बारे में बताएंगे आइए जानें...

Slideshow/s by: शिव शुक्लाUpdated Jan 6 2026, 18:30 IST
प्राचीन भारत नदी-कुओं और तालाब थे जल के स्त्रोतImage Credit : Ai01 / 06

प्राचीन भारत नदी-कुओं और तालाब थे जल के स्त्रोत

प्राचीन भारत में जल को जीवन का आधार माना गया था। इसलिए उस दौर में पानी के संग्रह, संरक्षण और वितरण के लिए अत्यंत वैज्ञानिक और टिकाऊ व्यवस्थाएं विकसित की गई थीं। तब नदियों के साथ-साथ कुएं, बावड़ियां, तालाब और झीलें पानी का संसाधन थे। इनसे पीने का पानी और खेतों की सिंचाई की जाती थी। इसके लिए राजे-महाराजे तीर्थ और कूपों का निर्माण कराते थे।ऐसे में सवाल यह है कि जब सब कुछ अच्छा चल रहा था, तो फिर पाइपलाइन से पानी के वितरण की व्यवस्था क्यों शुरू करनी पड़ी और वो शहर कौन सा था, जहां इसकी शुरुआत की गई। इस सवाल का जवाब है पुणे। भारत में आज से करीब 140 साल पहले पुणे में ही पाइपलाइन बिछाकर नदियों का पानी शहर तक लाने की व्यवस्था की गई थी। तब यह लोगों के लिए किसी जादू जैसा ही था। कई बार तो लोग पाइप से पानी निकलते देख डर जाया करते थे।

क्यों करनी पड़ी पाइपलाइन की व्यवस्थाImage Credit : Ai02 / 06

क्यों करनी पड़ी पाइपलाइन की व्यवस्था

उस समय भारत में अंग्रेजों का शासन था और 1817 में जब पुणे पर अंग्रेजों की सत्ता स्थापित हुई तो इसे कैंटोनमेंट बनाया गया था। जिस कारण वहां बड़ी संख्या में अंग्रेज अधिकारियों और उनके परिवारों ने रहना और बसना शुरू किया। तब वहां पानी के मुख्य संसाधन कुएं, तालाब, बावडियां आदि ही थे और बरसात के सीजन में इनका पानी आमतौर पर दूषित हो जाता था। जिसके कारणल हैजा, टायफाइट और डायरियां जैसी बीमारियां फैलती थीं और उनके कारण गांव के गांव साफ हो जाते थे। इतना ही नहीं, वहां रहने वाले अंग्रेज अधिकारियों उनके परिवारों में भी खराब पानी से होने वाली समस्याएं आम हो गईं। तब उनका माथा ठनका। फिर उन्होंने इसका निदान करने का फैसला किया। काफी सोंचविचार कर उन्होंने इंग्लैंड की तर्ज पर यहां भी पाइपलाइन बिछाने का फैसला किया, ताकि उन्हें साफ पानी मिल सके।

1870 में ऐसे बनी योजनाImage Credit : Ai03 / 06

1870 में ऐसे बनी योजना

ये सब देखते हुए ब्रिटिश इंजीनियरों ने साल 1870 में यह तय किया कि पुणे कैंटोनमेंट तक पानी पाइपलाइन के माध्यम से पहुंचाया जाए। इसके तहत सबसे पहले पानी के भंडारण के लिए एक बड़े बांध के निर्माण का फैसला किया गया, ताकि वहां संग्रहित पानी को बाद में पाइपलाइन से शहर तक भेजा जा सके। इस योजना के पहले चरण में 1873 में मुठा नदी पर बांध का निर्माण शुरू हुआ। लगभग छह साल की कठिन मेहनत के बाद 1879 में खडकवासला बांध बनकर तैयार हुआ। इसे पत्थर और चूना-गारे से बेहद मजबूत बनाया गया था। ताकि इसकी मजबूत दीवारें पानी के बहाव को रोक सकें। ये बांध उन्नत इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण था। 1879 में बनाए गए इस बांध पर तब करीब 50 लाख रुपये खर्च हुए थे।

भारत में बिछी पहली ग्रेविटी आधारित पाइपलाइनImage Credit : Ai04 / 06

भारत में बिछी पहली ग्रेविटी आधारित पाइपलाइन

बांध बनने के बाद पानी को करीब 20 किलोमीटर दूर पुणे शहर तक पहुंचाना बड़ी चुनौती थी। इंजीनियर कर्नल आर.एस. कैपल और जे.एच.सी. फिंडक्ले के नेतृत्व में भारत की पहली ग्रेविटी आधारित पाइपलाइन बिछाई गई, जिसमें पानी ऊंचाई से अपने दबाव से बहता था।

लंदन से लाए गए थे पाइपImage Credit : Ai05 / 06

लंदन से लाए गए थे पाइप

उस समय चूंकि भारत में पाइप नहीं बनते थे ऐसे में मजबूत पाइपें लंदन से मंगाई गईं। जिन्हें मुंबई से बैलगाड़ियों के जरिये पुणे पहुंचाया गया। चूंकि महाराष्ट्र और खासकर पुणे वाले इलाके में मैदान नहीं है ऐसे में पाइपलाइन बिछाने का काम भी बेहद कठिन था। खडकवासला से पुणे तक चट्टानें काट-काट कर पाइप बिछानी पड़ीं। काफी सारी मुश्किलों के बाद यह काम 1880 के दशक की शुरुआत में पूरा हुआ। इस काम में कई मजदूरों की जान भी गई।

पुणे बना पहला<u>​</u> आधुनिक जल-आपूर्ति वाला शहरImage Credit : Ai06 / 06

पुणे बना पहला आधुनिक जल-आपूर्ति वाला शहर

इस सफलता ने पुणे को भारत का पहला आधुनिक जल-आपूर्ति वाला शहर बना दिया। अपने समय में यह एक बड़ी उपलब्धि थी कि पुणे पहला ऐसा शहर बना, जहां घरों तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाया गया।हालांकि, शुरुआत में आम भारतीयों ने इस नई व्यवस्था का विरोध किया, क्योंकि उनका कहना था कि नल का पानी शुद्ध नहीं हैं। लेकिन जब धीरे-धीरे पानी से होने वाली बीमारियां कम होने लगीं तो उन्होंने भी इसे अपना लिया।

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