How to identify fake diamonds: हर किसी को हीरे की चाहत होती है। डायमंड की रिंग, ईयरिंग से नेकलेस तक पर तो महिलाएं जान छिड़कती हैं। हीरा लेना हर कोई चाहता है कि लेकिन इतना महंगा होने के कारण ये सबके लिए मुमकिन नहीं हो पाता। हीरे की डिमांड को देखते हुए मार्केट में नकली हीरे के गहने भी हैं। इन नकली हीरों को लैब ग्रोन डायमंड (Lab Grown Diamond) कहा जाता है।
यहां हम आपको बता रहे हैं कि असली और नकली हीरे में फर्क कैसे करें। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि केवल देखकर ही आप नहीं बता पाएंगे कि हीरा असली या नकली। इसके लिए कुछ जरूरी बातों को समझना होगा।
नेचुरल और लैब ग्रोन डायमंड में क्या है अंतर
प्राकृतिक हीरे करोड़ों साल पहले पृथ्वी के भीतर अत्यधिक तापमान और दबाव के कारण बनते हैं। इन्हें खदानों से निकाला जाता है। वहीं लैब-ग्रोन डायमंड आधुनिक तकनीक की मदद से प्रयोगशालाओं में तैयार किए जाते हैं। वैज्ञानिक प्राकृतिक परिस्थितियों जैसी ही स्थिति बनाकर कुछ ही हफ्तों में इन्हें विकसित कर लेते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि रासायनिक संरचना, कठोरता और चमक के मामले में दोनों लगभग समान होते हैं। इसलिए केवल देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि हीरा किस प्रकार का है।
क्या जौहरी बिना मशीन के पहचान सकता है?
कई लोग मानते हैं कि अनुभवी जौहरी देखते ही बता देगा कि हीरा प्राकृतिक है या लैब-ग्रोन। लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। जेमोलॉजिस्ट बताते हैं कि आज कल लैब-ग्रोन डायमंड इतने हाई क्वालिटी वाले होते हैं कि उन्हें पहचानने के लिए खास मशीनों की जरूरत पड़ती है। इसलिए सिर्फ लेंस से जांच करना हमेशा पर्याप्त नहीं होता।
सबसे पहले देखें सर्टिफिकेट
अगर आपने हीरा खरीदा है या किसी ने गिफ्ट किया है, तो उसके साथ मिला डायमंड सर्टिफिकेट सबसे भरोसेमंद दस्तावेज होता है। अंतरराष्ट्रीय जेमोलॉजिकल संस्थान जैसे Gemological Institute of America और International Gemological Institute अपने प्रमाणपत्र में साफ लिखते हैं कि हीरा प्राकृतिक है या लैब-ग्रोन। इसलिए खरीदारी करते समय हमेशा प्रमाणित डायमंड ही लेना चाहिए।
लेजर इंस्क्रिप्शन से पहचान सकते हैं
आजकल कई प्रमाणित हीरों के किनारे पर माइक्रोस्कोप से दिखाई देने वाली लेजर मार्किंग होती है। इसमें रिपोर्ट नंबर या हीरे की पहचान से जुड़ी जानकारी दर्ज रहती है। इस नंबर को संबंधित लैब की वेबसाइट पर जांचकर हीरे की पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
क्या कीमत से अंदाजा लगाया जा सकता है?
अक्सर लैब-ग्रोन डायमंड की कीमत प्राकृतिक हीरों की तुलना में काफी कम होती है। यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में इनकी मांग तेजी से बढ़ी है। केवल कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं होगा, क्योंकि डिजाइन, ब्रांड और हीरे की गुणवत्ता के आधार पर दाम बदल सकते हैं।
कौन सा विकल्प बेहतर है?
यह पूरी तरह आपकी प्राथमिकता पर निर्भर करता है। अगर आप दुर्लभता, प्राकृतिक उत्पत्ति और लंबे समय से चली आ रही परंपरा को महत्व देते हैं, तो प्राकृतिक हीरा बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं अगर आप कम बजट में बड़ा और आकर्षक डायमंड चाहते हैं, तो लैब-ग्रोन डायमंड भी अच्छा विकल्प माना जाता है।
दोनों देखने में लगभग एक जैसे होते हैं और बिना आधुनिक परीक्षण के इनमें फर्क कर पाना आसान नहीं है। इसलिए अगर आपको डायमंड गिफ्ट में मिला है और उसके बारे में जानना चाहते हैं, तो अनुमान लगाने के बजाय उसका सर्टिफिकेट, लेजर इंस्क्रिप्शन या किसी प्रमाणित जेमोलॉजिकल लैब की जांच पर भरोसा करें। यही सबसे सुरक्षित और सटीक तरीका है।
