भारत में सारे ही त्योहार जोश के साथ मनाए जाते हैं। ऐसे ही आने वाले दशहरा की धूम भी हर जगह देखने को मिल रही है। इस साल 2 अक्टूबर के दिन पर दशहरा मनाया जाएगा। इस दिन पर रावण के पुतले को जलाने का खास महत्व होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, देश में ऐसी भी कुछ जगहें हैं, जहां रावण दहन होता ही नहीं है।
दशहरा पर रावण दहन होता है, जिसे बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना जाता है। लेकिन भारत में कई जगहें ऐसी भी हैं, जहां पर रावण की पूजा की जाती है।
झारखंड के देवघर में भी रावण दहन नहीं होता है। यहां पर रावण को पूज्यनीय माना जाता है। यहां पर दशहरा पर खास पूजा होती है।
मध्य प्रदेश के मंदसौर को रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका माना जाता है। इसलिए यहां पर रावण दहन नहीं होता है, क्योंकि रावण यहां के दामाद हैं। दामाद के सम्मान की परंपरा के कारण यहां रावण की पूजा की जाती है, न कि दहन।
इस गांव को रावण की जन्मस्थली माना जाता है, और यहां रावण का मंदिर भी है।
मंडोर में दशहरा रावण के पुतले को जलाने के बजाय शोक के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि यहाँ के लोग रावण की पत्नी मंदोदरी के पिता मय दानव के अनुसार रावण को अपना दामाद मानते हैं।
बैजनाथ (कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश) में दशहरा नहीं मनाया जाता है, क्योंकि यह रावण की तपोस्थली मानी जाती है। यहाँ रावण का पुतला नहीं जलाया जाता और अगर कोई ऐसा करने का प्रयास करता भी है, तो उनके साथ कोई बुरी घटना होने की बात कही जाती है। यह एक ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव के भक्त रावण को कोई जला नहीं सकता, इससे महादेव क्रोधित हो जाते हैं।