भारत में किस जगह नहीं होता रावण दहन, एकदम अलग ढंग से मनाया जाता है दशहरा.. जिंदगी में एक बार जरूर देखें

भारत में हर त्योहार बहुत ही धूम धाम के साथ मनाया जाता है। ऐसे में ही शारदीय नवरात्रि के बाद दशहरा भी मनाया जाएगा। दशहरे पर रावण दहन का खास महत्व होता है, हालांकि देश में कुछ जगहें ऐसी भी हैं, जहां पर रावण दहन नहीं होता है। देखें देश के किन हिस्सों में रावण का पुतला नहीं जलाते।

Authored by: अवनी बागरोलाUpdated Sep 25 2025, 12:39 IST
दशहरा कहां नहीं मनताImage Credit : Istock01 / 07

दशहरा कहां नहीं मनता

भारत में सारे ही त्योहार जोश के साथ मनाए जाते हैं। ऐसे ही आने वाले दशहरा की धूम भी हर जगह देखने को मिल रही है। इस साल 2 अक्टूबर के दिन पर दशहरा मनाया जाएगा। इस दिन पर रावण के पुतले को जलाने का खास महत्व होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, देश में ऐसी भी कुछ जगहें हैं, जहां रावण दहन होता ही नहीं है।

इन जगहों पर होता है यूनिक दशहरा सेलिब्रेशनImage Credit : Istock02 / 07

इन जगहों पर होता है यूनिक दशहरा सेलिब्रेशन

दशहरा पर रावण दहन होता है, जिसे बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना जाता है। लेकिन भारत में कई जगहें ऐसी भी हैं, जहां पर रावण की पूजा की जाती है।

देवघर, झारखंडImage Credit : Istock03 / 07

देवघर, झारखंड

झारखंड के देवघर में भी रावण दहन नहीं होता है। यहां पर रावण को पूज्यनीय माना जाता है। यहां पर दशहरा पर खास पूजा होती है।

मंदसौर, मध्य प्रदेशImage Credit : Istock04 / 07

मंदसौर, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के मंदसौर को रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका माना जाता है। इसलिए यहां पर रावण दहन नहीं होता है, क्योंकि रावण यहां के दामाद हैं। दामाद के सम्मान की परंपरा के कारण यहां रावण की पूजा की जाती है, न कि दहन।​

बिसरख, उत्तर प्रदेशImage Credit : Istock05 / 07

बिसरख, उत्तर प्रदेश

इस गांव को रावण की जन्मस्थली माना जाता है, और यहां रावण का मंदिर भी है।

मंडोर, राजस्थानImage Credit : Istock06 / 07

मंडोर, राजस्थान

मंडोर में दशहरा रावण के पुतले को जलाने के बजाय शोक के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि यहाँ के लोग रावण की पत्नी मंदोदरी के पिता मय दानव के अनुसार रावण को अपना दामाद मानते हैं।

बैजनाथ, हिमाचल प्रदेशImage Credit : Istock07 / 07

बैजनाथ, हिमाचल प्रदेश

बैजनाथ (कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश) में दशहरा नहीं मनाया जाता है, क्योंकि यह रावण की तपोस्थली मानी जाती है। यहाँ रावण का पुतला नहीं जलाया जाता और अगर कोई ऐसा करने का प्रयास करता भी है, तो उनके साथ कोई बुरी घटना होने की बात कही जाती है। यह एक ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव के भक्त रावण को कोई जला नहीं सकता, इससे महादेव क्रोधित हो जाते हैं।

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