क्या आपने कभी अपने स्पोर्ट्स शूज या रनिंग शूज को ध्यान से देखा है? इनमें लेस लगाने के लिए कई छोटे-छोटे छेद होते हैं लेकिन सबसे ऊपर, जहां लेस खत्म होती है, वहां अक्सर दो अतिरिक्त छेद भी दिए जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि ज्यादातर लोग इन छेदों को इस्तेमाल ही नहीं करते।
कई लोगों को लगता है कि ये सिर्फ जूते का डिजाइन अच्छा दिखाने के लिए बनाए गए हैं लेकिन ऐसा नहीं है। इनका एक बेहद काम का इस्तेमाल होता है, जिसे “हील लॉक” या “लेस लॉक” कहा जाता है।
दरअसल, जब हम चलते, दौड़ते या एक्सरसाइज करते हैं तो पैर जूते के अंदर थोड़ा आगे-पीछे खिसक सकता है। खासकर दौड़ते समय एड़ी ऊपर उठने लगती है। इससे जूता ढीला महसूस हो सकता है और कई बार पैर में घर्षण के कारण छाले भी पड़ सकते हैं।
अगर आप इन छेदों में लेस को खास तरीके से डालकर बांधते हैं, तो जूते का ऊपरी हिस्सा एड़ी के आसपास ज्यादा अच्छी तरह फिट हो जाता है। इससे पैर जूते के अंदर कम हिलता-डुलता है।
सबसे पहले जूते की लेस को सामान्य तरीके से आखिरी से पहले वाले छेद तक बांधें। इसके बाद लेस को सीधे ऊपर ले जाकर सबसे ऊपर वाले अतिरिक्त छेद में डालें। लेकिन लेस को पूरी तरह खींचने के बजाय एक छोटा सा लूप छोड़ दें।
अब लेस के दोनों सिरों को सामने से बने इन छोटे लूप्स के अंदर डालें और धीरे-धीरे खींचें। इसके बाद सामान्य तरीके से गांठ बांध दें। इससे एड़ी के आसपास जूते की पकड़ मजबूत हो जाती है।
यह तरीका खासतौर पर रनिंग, जिम, ट्रेकिंग या लंबी पैदल यात्रा करने वालों के लिए उपयोगी हो सकता है। दौड़ते समय पैर आगे की तरफ ज्यादा खिसकने से बच सकता है और एड़ी भी जूते के अंदर बेहतर तरीके से अपनी जगह पर बनी रह सकती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को इन छेदों का इस्तेमाल करना ही चाहिए। अगर आपका जूता पहले से आरामदायक है और पैर अच्छी तरह फिट रहता है, तो इन्हें खाली छोड़ना भी बिल्कुल ठीक है।
एक और जरूरी बात लेस को इतना कसकर नहीं बांधना चाहिए कि पैर में दर्द, सुन्नपन या खून का प्रवाह प्रभावित होने लगे। आरामदायक फिट सबसे ज्यादा जरूरी है।