मेघालय की उमियाम झील के बारे में आज हम जानेंगे जो सिर्फ एक टूरिस्ट स्पॉट नहीं है बल्कि सुकून का असली घर है। शिलांग के पास बनी ये झील आपको पहली नजर में ही पसंद आ जाएगी।
इस झील को आंसुओं का पानी भी कहते हैं। ये नाम सुनकर ही लगता है कि इसके पीछे कोई खास कहानी जरूर होगी। कहते हैं कि दो बहनें स्वर्ग से धरती पर आई थीं, लेकिन एक रास्ता भटक गई। दूसरी बहन ने उसे याद करके इतना रोया कि उसके आंसुओं से ये झील बन गई। इसलिए इस जगह को इतना इमोशनल नाम मिला है।
ये झील नेचुरल नहीं, बल्कि इंसानों द्वारा बनाई गई है। 1960 के दशक में इसे बिजली बनाने की परियोजना के तहत बनाया गया था। आज ये नॉर्थ-ईस्ट की सबसे बड़ी झीलों में गिनी जाती है।
झील के चारों तरफ आपको सिर्फ हरियाली, पहाड़ और शांत माहौल मिलेगा। यहां का नजारा इतना सुंदर होता है कि बस बैठकर देखने का मन करता है।
सर्दियों में ये झील एकदम शीशे की तरह साफ और चमकदार लगती है, वहीं बारिश के मौसम में यहां धुंध और हरियाली का अलग ही मजा होता है। हर मौसम में इसका रूप बदल जाता है।
अगर आप एडवेंचर पसंद करते हैं, तो यहां बोटिंग और कयाकिंग जैसे वॉटर स्पोर्ट्स का मजा ले सकते हैं। साथ ही, फोटो खींचने के लिए ये जगह एकदम परफेक्ट है।