कालका-शिमला टॉय ट्रेन हिमालय की गोद में चलने वाली भारत की सबसे खूबसूरत रेल यात्राओं में से एक है। 96 किलोमीटर लंबा यह सफर यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का हिस्सा है और अपने प्राकृतिक नजारों के लिए मशहूर है।
1903 में बनी यह नैरो-गेज लाइन 102 सुरंगों और करीब 900 पुलों को पार करती है। इसे ब्रिटिश काल की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धियों में गिना जाता है।
जैसे-जैसे ट्रेन ऊंचाई पकड़ती है, मौसम और नजारे दोनों ही बदलते जाते हैं। मैदान छोड़ हरी घाटियां, चीड़–देवदार के जंगल, धुंध भरे पहाड़ और खिलखिलाती धूप… सब कुछ सफर को यादगार बना देता है।
यह टॉय ट्रेन पहाड़ों की रानी शिमला पहुंचने का सबसे लोकप्रिय विकल्प है। लग्जरी के हिसाब से प्रति टिकट खर्चा 400 से 600 रुपये के बीच रहता है।
अगर आप रास्ते के सुंदर नजारों का पूरा मजा लेना चाहते हैं तो बेहतर रहेगा कि आप ट्रेन की राइट साइड की ओर बैठें।
अप्रैल से जून और अक्टूबर, नवंबर के बीच इस ट्रेन की सैर बढ़िया रहती है। क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों में इस पर बहुत भीड़ होती है।
अलग अलग ट्रेनों के विकल्प आपको बुक करने के लिए IRCTC की वेबसाइट पर मिल जाएंगे। कालका स्टेशन पर डायरेक्ट टिकट भी ले सकते हैं। लेकिन पीक सीजन में एडवांस बुकिंग कराना सही रहेगा।