ना मिला सम्मान खूब हुए नजरअंदाज, इस देश में 191 सालों से दफ्न हैं राजा राम मोहन राय

भारतीय पुनर्जागरण के जनक Raja Ram Mohan Roy के नाम से तो हर भारतीय परिचत है। लेकिन, ये बात बेहद कम लोग जानते हैं कि ब्रिटेन के ब्रिस्टल में राजा राममोहन राय की कब्र है इसके पीछे का कारण आपको हैरान कर देगा। इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपसे उसी चीज का जिक्र करने जा रहे हैं।

Authored by: प्रभात शर्माUpdated Oct 21 2024, 11:49 IST
विषैली कुरीतियां का अंतImage Credit : Google01 / 06

विषैली कुरीतियां का अंत

समाज में फैली विषैली कुरीतियां जैसे सती प्रथा, बाल विवाह जब देश को पीछे ले जाने का काम कर रही थीं उस वक्त राजा राम मोहन राय ही थे जिन्होंने इसका खुलकर विरोध किया था। राजा राम मोहन राय ने सती प्रथा के खिलाफ कानून बनवाया था।

ब्रिटेन में है समाधिImage Credit : Google02 / 06

ब्रिटेन में है समाधि

आपको ये बात जानकर हैरानी होगी कि राजा राम मोहन राय की कब्रगाह ब्रिटेन के ब्रिस्टल शहर में है। भारत को कई कुरीतियों से आजादी दिलाने वाले महान पुरुष राजा राम मोहन राय आर्नोस वेल कब्रिस्तान में दफ्न हैं।

इंग्लैंड में बीता आखिरी समयImage Credit : Google03 / 06

इंग्लैंड में बीता आखिरी समय

राजा रामोहन राय पश्चिमी देशों में भारत की आवाज रखना चाहते थे। इंग्लैंड में कई जगह भाषण देने के बाद वो अमेरिका जाना चाहते थे लेकिन जब वो इंग्लैंड में थे तब मेनेंजाइटिस से ग्रसित होने के बाद उनकी मौत हो गई।

उपेक्षित रही कब्रगाहImage Credit : Google04 / 06

उपेक्षित रही कब्रगाह

61 साल की उम्र में 27 सितंबर 1833 को राजा राम मोहन राय ने शरीर छोड़ा था। समय के उस काल में इंग्लैंड में दाह-संस्कार की अनुमति नहीं थी जिसके चलते उन्हें कब्रिस्तान में दफ्न किया गया था। सालों तक उनकी कब्रगाह आर्नोस वेल कब्रिस्तान में उपेक्षित रही।

ब्रिटिश महिला की पड़ी नजरImage Credit : Google05 / 06

ब्रिटिश महिला की पड़ी नजर

बीबीसी में छपी रिपोर्ट के अनुसार एक भारतीय पारसी से शादी करने वाली ब्रिटिश टीचर महिला की नजर राजा राम मोहन राय की उपेक्षित कब्रगाह पर पड़ी थी। मुंबई में पढ़ाने वाली ये टीचर जब ब्रिटेन लौटकर वापस आई थीं तब उन्होंने देखा कि यहां कब्र का हाल बुरा है।

समाधि का जीर्णोद्धारImage Credit : Google06 / 06

समाधि का जीर्णोद्धार

बाद में ब्रिटेन में राजा राम मोहन राय की समाधि का जीर्णोद्धार किया गया और ब्रिस्टल के एक खास हिस्से में उनकी मूर्ति भी लगाई गई। ऐसे में अगर आप ब्रिस्टल घूमने जाएं तो इस जगह पर जाना बिल्कुल मत भूलें।

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