धीमी जिंदगी और 90s टाइप कैफे, आज भी यहां जिंदा है पुरानी दुनिया

अक्सर आपने बड़े-बुजुर्गों को ये कहते सुना होगा कि एक ऐसा वक्त था जब जीवन धीमा, शांत और प्रकृति के करीब था। अगर आप सोचते हैं कि पुरानी दुनिया का अनुभव आज के टाइम में कर पाना नामुमकिन है तो आज आपकी ये गलतफहमी दूर होने वाली है।

Authored by: प्रभात शर्माUpdated Aug 17 2025, 11:23 IST
​बीते दौर की गोद में सुकून​Image Credit : Canva01 / 07

​बीते दौर की गोद में सुकून​

बीते दौर की गोद में सुकून के दो पल बिताना सपने जैसा लगता है। लेकिन, आज के टाइम में भी आप पुराने जमाने वाली शांति और सुकून को महसूस कर सकते हैं। यहां जिंदगी धीरे चलती है और लोग मुस्कराते हैं। (फोटो-कैनवा)

​शिमला, हिमाचल प्रदेश​Image Credit : Canva02 / 07

​शिमला, हिमाचल प्रदेश​

ब्रिटिश भारत की समर कैपिटल के रूप में फेमस शिमला आज भी आपको पुराने जमाने की वाइब देती है। पुराने जमाने के चर्च और लकड़ी के घर, टॉय ट्रेन, मॉल रोड आज भी शिमला का विंटेज चार्म जिंदा रखे हुए हैं।

​दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल​Image Credit : Canva03 / 07

​दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल​

अंग्रेजों के समय की बनी कोठियां और होटल्स आज भी दार्जिलिंग में मौजूद हैं। टॉय ट्रेन और चाय बागानों की शान दार्जिलिंग की यात्रा आपको बेहद प्राचीन समय में ले जा सकती है। दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे यहां का प्रमुख आकर्षण है।

​माउंट आबू, राजस्थान​Image Credit : Canva04 / 07

​माउंट आबू, राजस्थान​

पुराने जमाने के राजसी बंगले और देवस्थल के दीदार करना आपका दिल खुश कर सकता है। नक्की झील और दिलवाड़ा मंदिर यहां का प्रमुख आकर्षण है। रेगिस्तान में बसे एक ठंडे आशियाने के लिए आप यहां जा सकते हैं।

​लैंडौर, उत्तराखंड​Image Credit : Canva05 / 07

​लैंडौर, उत्तराखंड​

अंग्रेजों के समय की गली-कूचियां आज भी यहां पर पहले की ही तरह बनी हुई हैं। रस्किन बॉन्ड की कहानियों वाला वातावरण, ब्रिटिश बंगले और पुरानी बेकरी लैंडौर की पहचान हैं।

​कुन्नूर, तमिलनाडु​Image Credit : Canva06 / 07

​कुन्नूर, तमिलनाडु​

यूरोपीय शैली के चर्च और घर आपको पुराने जमाने की याद दिला देंगे। पुरानी कालोनी की तरह सजा-संवरा कुन्नूर शांत और कम भीड़ वाला स्थान है जहां दो पल सुकून के लिए जाया जा सकता है।

​मैक्लॉडगंज, हिमाचल प्रदेश​Image Credit : Canva07 / 07

​मैक्लॉडगंज, हिमाचल प्रदेश​

शांत वातावरण और 90s-टाइप कैफे मैक्लॉडगंज की पहचान है। तिब्बती संस्कृति और ब्रिटिश अतीत का मेल आपको यहां देखने को मिल जाएगा। ब्रिटिश समय की सड़कें और बंगले आज भी यहां मौजूद है।

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