सितंबर में उदयपुर का रंग बिल्कुल बदल जाता है। बारिश के बाद अरावली की पहाड़ियां हरी दिखाई देती हैं और पिछोला व फतेहसागर झील का नजारा ज्यादा खूबसूरत लगता है। सिटी पैलेस, सज्जनगढ़ मॉनसून पैलेस और सहेलियों की बाड़ी घूम सकते हैं। शाम के समय पिछोला झील में बोटिंग इस यात्रा को यादगार बना सकती है।
नीले घर, पुराने महल, बावड़ियां और हरियाली से घिरी पहाड़ियां- बूंदी सितंबर में किसी पेंटिंग जैसी दिखाई देती है। यहां जयपुर और उदयपुर जैसी भीड़ भी नहीं मिलती। तारागढ़ किला, गढ़ पैलेस, रानीजी की बावड़ी और नवल सागर झील प्रमुख आकर्षण हैं। इतिहास और सुकून पसंद करने वाले लोगों के लिए यह एक शानदार ऑफबीट डेस्टिनेशन है।
बेतवा नदी के किनारे बसा ओरछा बारिश के बाद बेहद शांत और हरा-भरा नजर आता है। यहां के पुराने महल, मंदिर और छतरियां प्रकृति के बीच अलग ही दृश्य बनाते हैं। ओरछा किला, जहांगीर महल, राम राजा मंदिर और बेतवा नदी का किनारा जरूर देखें। सुबह या शाम नदी के पास बैठकर सूर्योदय और सूर्यास्त का आनंद लिया जा सकता है।
कॉफी के बागान, धुंध से ढकी पहाड़ियां और छोटे-छोटे झरने सितंबर में कूर्ग की खूबसूरती बढ़ा देते हैं। यहां एबी फॉल्स, राजा सीट, मंडलपट्टी व्यू पॉइंट और दुबारे एलीफेंट कैंप देखा जा सकता है। कॉफी एस्टेट के बीच किसी होमस्टे में रुकना यात्रा को और दिलचस्प बना सकता है।
बारिश से धुले चाय के बागान और बादलों में छिपती पहाड़ियां मुन्नार को सितंबर का बेहतरीन डेस्टिनेशन बनाती हैं। एराविकुलम नेशनल पार्क, मट्टुपेट्टी डैम, इको पॉइंट और टॉप स्टेशन यहां की प्रमुख जगहें हैं। सुबह के समय चाय के बागानों के बीच टहलने का अनुभव बेहद सुकून देता है। हालांकि पहाड़ी रास्तों पर फिसलन हो सकती है, इसलिए निकलने से पहले स्थानीय मौसम और सड़क की स्थिति जरूर जांचें।
जीरो वैली अपनी हरी धान की खेती, देवदार के जंगलों और शांत गांवों के लिए जानी जाती है। सितंबर में यहां की घाटी ताजगी और हरियाली से भरी दिखाई देती है। हापोली, टैली वैली, सिद्धेश्वर नाथ मंदिर और आपातानी समुदाय के गांव देखे जा सकते हैं। भीड़ से दूर धीमी और सुकून भरी यात्रा चाहने वालों को यह जगह पसंद आएगी।
अगर आपको बादल, झरने और गहरी हरी घाटियां आकर्षित करती हैं तो सितंबर में चेरापूंजी जा सकते हैं। नोहकलिकाई फॉल्स, सेवन सिस्टर्स फॉल्स, मावसमाई गुफाएं और लिविंग रूट ब्रिज यहां के प्रमुख आकर्षण हैं। बारिश कम होने के बाद झरनों में भरपूर पानी दिखाई देता है। ट्रेकिंग करते समय फिसलन और अचानक बदलते मौसम का ध्यान रखें। शिलॉन्ग से चेरापूंजी लगभग 55 किलोमीटर दूर है।