कई स्मार्ट टीवी में वॉयस असिस्टेंट पहले से सक्रिय होता है। इसकी मदद से यूजर "Hey Google" या "Alexa" जैसे कमांड देकर टीवी को नियंत्रित कर सकते हैं। इसके लिए टीवी लगातार आवाज पहचानने की स्थिति में रहता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ स्मार्ट टीवी वॉयस कमांड, देखने की आदतों और अन्य उपयोग संबंधी डेटा को रिकॉर्ड कर सकते हैं। कंपनियों का कहना है कि इस डेटा का उपयोग सेवाओं को बेहतर बनाने और यूजर को अधिक प्रासंगिक सुझाव या विज्ञापन दिखाने के लिए किया जाता है।
यदि आप वॉयस असिस्टेंट का इस्तेमाल नहीं करते हैं, तो इसे बंद करना बेहतर विकल्प हो सकता है। इसके लिए टीवी की सेटिंग्स में जाकर Voice Recognition, Voice Control या Microphone Access जैसे विकल्पों को बंद किया जा सकता है।
अधिकांश Samsung, LG, Sony और एंड्रॉयड टीवी में ये सेटिंग्स Privacy या Terms & Conditions सेक्शन के भीतर मिल जाती हैं। इसके अलावा Interest-Based Ads और Viewing Information Services जैसे विकल्पों को भी बंद किया जा सकता है।
Automatic Content Recognition (ACR) नामक फीचर भी यूजर की देखने की आदतों पर नजर रख सकता है। यह तकनीक यह पता लगाती है कि आप कौन-सा चैनल देख रहे हैं, किस प्रकार का कंटेंट पसंद करते हैं और उसे कितनी देर तक देखते हैं। इस जानकारी का उपयोग पर्सनलाइज्ड विज्ञापन और कंटेंट सुझाव देने के लिए किया जाता है। यदि आप अपनी प्राइवेसी को प्राथमिकता देते हैं, तो ACR फीचर को बंद करना एक अच्छा कदम हो सकता है।
जब वॉयस फीचर की जरूरत न हो, तो माइक्रोफोन का उपयोग न करना बेहतर माना जाता है। जिन टीवी मॉडल्स में फिजिकल माइक्रोफोन स्विच उपलब्ध है, उसे मैन्युअली बंद किया जा सकता है। कुछ स्मार्ट टीवी में कैमरा भी दिया जाता है। ऐसे मामलों में अतिरिक्त सुरक्षा के लिए कई लोग कैमरे को ढककर रखते हैं। हालांकि अधिकांश टीवी मॉडल्स में फ्रंट कैमरा नहीं होता।
स्मार्ट टीवी भी स्मार्टफोन और लैपटॉप की तरह इंटरनेट से जुड़े डिवाइस हैं। इसलिए इनमें भी साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिम मौजूद रहते हैं। यूजर्स समय-समय पर टीवी के सॉफ्टवेयर अपडेट को जरूर चेक करें। आमतौर पर कंपनियां कुछ वर्षों तक सुरक्षा अपडेट और पैच जारी करती हैं। इन अपडेट्स को इंस्टॉल करने से सुरक्षा कमजोरियों को दूर करने में मदद मिलती है।
प्राइवेसी और सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखना आज के डिजिटल दौर की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। यदि आप अपने स्मार्ट टीवी की प्राइवेसी सेटिंग्स की समीक्षा कर लेते हैं और अनावश्यक फीचर्स को बंद कर देते हैं, तो अपनी व्यक्तिगत जानकारी और घरेलू बातचीत को बेहतर तरीके से सुरक्षित रख सकते हैं। इसलिए अगली बार जब आप अपना स्मार्ट टीवी चालू करें, तो उसकी प्राइवेसी और सुरक्षा सेटिंग्स पर एक नजर जरूर डालें। यह छोटा सा कदम आपकी डिजिटल सुरक्षा को काफी मजबूत बना सकता है।