दूरसंचार विभाग ने इन सभी कंपनियों को 28 नवंबर को आधिकारिक निर्देश जारी किए थे और नियमों का पालन करने के लिए 90 दिनों का समय दिया गया था। यह समयसीमा 28 फरवरी 2026 को समाप्त हो रही है। कंपनियों को 120 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। इसके बाद 1 मार्च से यह नियम पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा।
नए नियम के अनुसार, किसी भी मैसेजिंग ऐप को चलाने के लिए उस मोबाइल में वही SIM कार्ड सक्रिय होना जरूरी होगा, जिससे अकाउंट रजिस्टर किया गया है।
यदि यूजर SIM निकाल देता है, बदल देता है या SIM निष्क्रिय हो जाती है, तो WhatsApp, Telegram और अन्य ऐप्स उस डिवाइस पर काम करना बंद कर देंगे। दोबारा सेवाएं शुरू करने के लिए उसी SIM को फिर से लगाकर सत्यापन करना होगा।
नए नियम का असर वेब और डेस्कटॉप वर्जन पर भी पड़ेगा। WhatsApp Web और Telegram Web जैसे प्लेटफॉर्म्स हर 6 घंटे में अपने आप लॉगआउट हो जाएंगे। इसके बाद यूजर्स को दोबारा लॉगिन करने के लिए मोबाइल से QR कोड स्कैन करना होगा और मोबाइल में सक्रिय SIM होना जरूरी होगा।
सरकार का कहना है कि इस नियम का मुख्य उद्देश्य साइबर धोखाधड़ी, SIM swap फ्रॉड और फर्जी पहचान से होने वाले अपराधों को रोकना है। SIM को अकाउंट से जोड़ने से यूजर की पहचान को बेहतर तरीके से सत्यापित किया जा सकेगा और साइबर अपराधियों पर नजर रखना आसान होगा।
मैसेजिंग ऐप कंपनियों और इंडस्ट्री संगठनों ने इस नियम को लेकर कुछ चिंताएं भी जताई हैं। उनका कहना है कि कई यूजर्स एक से अधिक डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं या अक्सर यात्रा करते रहते हैं, जिससे उन्हें असुविधा हो सकती है। हालांकि सरकार का मानना है कि यूजर्स की सुरक्षा और साइबर सुरक्षा को मजबूत करना सबसे ज्यादा जरूरी है।
यह नया नियम भारत में डिजिटल कम्युनिकेशन को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। SIM आधारित सत्यापन से फर्जी अकाउंट और साइबर अपराधों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। 1 मार्च 2026 से लागू होने वाला यह बदलाव करोड़ों मैसेजिंग ऐप यूजर्स को प्रभावित करेगा।