स्मार्टफोन की स्क्रीन सबसे ज्यादा बैटरी खर्च करने वाले हिस्सों में से एक है। यदि ब्राइटनेस हमेशा 100 प्रतिशत पर रहती है, तो बैटरी तेजी से खत्म होती है। बेहतर होगा कि ऑटो ब्राइटनेस का इस्तेमाल करें या जरूरत के हिसाब से ब्राइटनेस को 40 से 60 प्रतिशत के बीच रखें।
अगर आपके इलाके में 5G नेटवर्क स्थिर नहीं है, तो फोन बार-बार नेटवर्क बदलने की कोशिश करता है। इससे बैटरी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में जरूरत न होने पर 4G नेटवर्क का इस्तेमाल करना बैटरी बचाने में मदद कर सकता है।
कई ऐप्स बंद करने के बाद भी बैकग्राउंड में चलते रहते हैं और लगातार इंटरनेट, लोकेशन तथा प्रोसेसर का इस्तेमाल करते हैं। फोन की सेटिंग्स में जाकर उन ऐप्स की बैकग्राउंड एक्टिविटी को सीमित करें जिनका आप नियमित रूप से इस्तेमाल नहीं करते।
लोकेशन, ब्लूटूथ और वाई-फाई जैसी सुविधाएं लगातार चालू रहने पर बैटरी की खपत बढ़ जाती है। जब इनकी जरूरत न हो, तो इन्हें बंद कर दें। इससे बैटरी बैकअप में सुधार देखने को मिल सकता है।
120Hz या 144Hz रिफ्रेश रेट वाली डिस्प्ले ज्यादा स्मूद अनुभव देती है, लेकिन इसके लिए अधिक बैटरी की जरूरत होती है। यदि बैटरी जल्दी खत्म हो रही है, तो 60Hz या स्टैंडर्ड रिफ्रेश रेट चुनना बेहतर विकल्प हो सकता है।
अगर आपके फोन में OLED या AMOLED डिस्प्ले है, तो डार्क मोड बैटरी बचाने में मदद कर सकता है। इसमें स्क्रीन के काले हिस्सों पर कम ऊर्जा खर्च होती है, जिससे बैटरी की खपत कम होती है।
ज्यादातर स्मार्टफोन में बैटरी सेवर या पावर सेविंग मोड का विकल्प मिलता है। इसे ऑन करने पर फोन गैर-जरूरी बैकग्राउंड प्रोसेस को सीमित कर देता है, जिससे बैटरी ज्यादा समय तक चलती है।
अगर सभी सेटिंग्स बदलने के बाद भी बैटरी बहुत तेजी से खत्म हो रही है, फोन जरूरत से ज्यादा गर्म होता है या चार्जिंग तेजी से गिरती है, तो संभव है कि बैटरी की क्षमता कम हो चुकी हो। ऐसी स्थिति में किसी अधिकृत सर्विस सेंटर पर बैटरी की जांच कराना उचित रहेगा।