बच्चा हो गया है वयस्क तो माता-पिता छोड़ दें ये 5 आदतें, पेरेंट्स को एक्सपर्ट्स की सलाह

बच्चा जब वयस्क हो जाता है तो अपने माता-पिता संग उसका रिश्ता एक नए दौर में प्रवेश करता है। 17-18 साल का होने के बाद वह अपने फैसले खुद लेने की क्षमता रखता है। उसके किसी की दखलअंदाजी बिल्कुल पसंद नहीं आती। पेरेंट्स को भी अपनी कुछ आदतों में बदलाव लाना होता है।

Authored by: Suneet SinghUpdated Aug 22 2026, 09:03 IST
बदलना होगा पेरेंटिंग स्टाइलImage Credit : Istock01 / 07

बदलना होगा पेरेंटिंग स्टाइल

फैमिली थेरेपिस्ट्स और पेरेंटिंग एक्सपर्ट्स की मानें तो बच्चे के वयस्क होने के बाद पेरेंट्स की भूमिका भी धीरे-धीरे बदलनी चाहिए। उम्र के इल पड़ाव पर पेरेंट्स उन्हें कंट्रोल करने की जगह गाइड करने पर ज्यादा ध्यान दें।

​सारे फैसले खुद लेना बंद करें​Image Credit : Istock02 / 07

​सारे फैसले खुद लेना बंद करें​

पढ़ाई, करियर, शादी, दोस्ती या भविष्य से जुड़े फैसले माता-पिता की सलाह से लिए जा सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय वयस्क बच्चे का होना चाहिए। सारे फैसले खुद लेने से बच्चे में आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी का भाव नहीं आ पाता है।

​गलती को नाकामी न समझें​Image Credit : Istock03 / 07

​गलती को नाकामी न समझें​

बड़े हो चुके बच्चे भी गलतियां करेंगे। हर बार तुरंत समस्या हल करने या डांटने के बजाय उनसे पूछा जा सकता है कि वे अगली बार क्या अलग करना चाहेंगे। इससे उन्हें अपनी गलतियों से सीखने और उनके परिणामों की जिम्मेदारी लेने का मौका मिलता है।

​पर्सनल लाइफ में ताकझांक न करें​Image Credit : Istock04 / 07

​पर्सनल लाइफ में ताकझांक न करें​

वयस्क बच्चे की निजी सीमाओं का सम्मान करना जरूरी है। उसके मैसेज, सोशल मीडिया, पैसे या हर गतिविधि पर लगातार नजर रखना भरोसे की कमी जैसा महसूस हो सकता है। बातचीत का रास्ता खुला रखें, लेकिन निजता का सम्मान भी करें।

​तुलना करना छोड़ें​Image Credit : Istock05 / 07

​तुलना करना छोड़ें​

भाई-बहन, रिश्तेदार या दोस्तों के बच्चों से तुलना बच्चे के आत्मसम्मान को चोट पहुंचा सकती है। हर व्यक्ति की अपनी गति और अपनी परिस्थितियां होती हैं। इसलिए यह देखने पर ध्यान दें कि आपका बच्चा पहले की तुलना में कितना आगे बढ़ा है।

​इमोशनल प्रेशर बनाना बंद करें​Image Credit : Istock06 / 07

​इमोशनल प्रेशर बनाना बंद करें​

पेरेंट्स की ये आदत बच्चे को अपराधबोध में डाल सकती है। करियर, नौकरी या निजी जीवन के फैसलों में अपनी इच्छा थोपने के बजाय अपनी राय बताएं और निर्णय का सम्मान करें। इससे रिश्ते में अनावश्यक तनाव कम होगा।

​बच्चे के दोस्त बन जाएं​Image Credit : Istock07 / 07

​बच्चे के दोस्त बन जाएं​

असल में बच्चे के वयस्क होने का अर्थ माता-पिता की भूमिका खत्म होना नहीं है। बल्कि भूमिका बदलना है। अब बच्चे को हर कदम पर पकड़कर चलाने के बजाय उसके साथ चलने की जरूरत है। विशेषज्ञ के अनुसार, लगातार नियंत्रण बच्चे के आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और मानसिक कल्याण को प्रभावित कर सकता है।

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