हैरान करने वाली बात ये है कि ये सारा डेटा एन्क्रिप्टेड नहीं था, बल्कि साधारण टेक्स्ट फॉर्मेट में मौजूद था, जिसे कोई भी व्यक्ति आसानी से पढ़ सकता था।
साइबर सुरक्षा रिसर्चर जेरेमिया फाउलर के अनुसार, यह डेटा एक अनसिक्योर डेटाबेस में पाया गया और संभवतः इसे किसी इन्फो-चोरी करने वाले मालवेयर के जरिए हासिल किया गया है। इस डेटाबेस में न केवल सोशल मीडिया या ऐप्स के पासवर्ड थे, बल्कि बैंक अकाउंट, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी पोर्टलों के लॉगिन डिटेल्स भी शामिल थे।
इस लीक की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि पासवर्ड तो बदले जा सकते हैं, लेकिन बैंकिंग और हेल्थ जैसी सेवाओं की निजी जानकारी का दुरुपयोग किया जा सकता है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि डिजिटल सुरक्षा अब विकल्प नहीं, जरूरत बन गई है।
फाउलर का कहना है कि उन्होंने 184 मिलियन से ज्यादा पासवर्ड वाली प्लेन टेक्स्ट फाइल को स्टोर करने वाले होस्टिंग प्रदाता से भी संपर्क किया, जिसके बाद सर्विस ने इसे आम लोगों के लिए अप्राप्य (inaccessible) बना दिया। लेकिन जब सुरक्षा रिसर्चर ने फाइल के मालिक के बारे में पूछा, तो होस्टिंग सर्विस ने विवरण शेयर करने से इनकार कर दिया।
मजबूत पासवर्ड बनाएं जिसमें अक्षर, संख्या और विशेष चिन्ह हों। हर अकाउंट के लिए अलग पासवर्ड का उपयोग करें। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) को जरूर एक्टिव करें।
किसी भी अनजान लिंक या ईमेल पर क्लिक न करें। पब्लिक वाई-फाई इस्तेमाल करते समय सतर्क रहें, या जरूरी न हो इस्तेमाल करना इग्नोर करें। अपने डिवाइस और ऐप्स को नियमित रूप से अपडेट करते रहें। केवल भरोसेमंद ऐप्स और वेबसाइट्स से ही डाउनलोड करें।