गौतम गंभाीर 2007 और 2011 का वर्ल्ड कप जीत चुके हैं। उन्होंने दोनों टूर्नामेंट में भारत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जो कि टीम के लिए आगे भी काम आ सकती है। गंभीर की 2011 विश्वकप की 97 रनों की पारी आज भी याद की जाती है।
गौतम गंभीर की सबसे खास बात ये है कि वो किसी भी मुद्दे पर खुलकर बोलते हैं। वो एकदम खरी और सीधी बात कहते हैं। उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि सामने वाले को बुरा लगेगा या अच्छा लगेगा। ये टीम के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। वे खिलाड़ियों को सही आकलन देकर मोटिवेट कर सकते हैं।
गौतम गंभीर हमेशा यही कहते हैं कि भारत में टीम से ज्यादा एक खिलाड़ी के व्यक्तिगत परफॉर्मेंस को महत्व दिया जाता है। अगर वो कोच बनते हैं तो फिर इस कल्चर को खत्म कर सकते हैं। अगर किसी बड़े खिलाड़ी ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया तो गौतम गंभीर उसे ड्रॉप करने में बिल्कुल भी नहीं हिचकिचाएंगे।
गौतम गंभीर 2022-23 में लखनऊ सुपर जायंट्स के कोच रहे थे और वहां पर दो बार टीम को प्लेऑफ में ले गए थे। उन्होंने हाल ही में केकेआर क मेंटोर के रुप में टीम को ट्रॉफी जिताई है। ऐसे में उनका कोचिंग अनुभव काम आ सकता है।
जय शाह ने ये साफ कर दिया था कि जो भी कोच बनेगा उसे भारतीय डोमेस्टिक क्रिकेट की अच्छी जानकारी होना जरूरी है। गंभीर लंबे समय तक डोमेस्टिक खेल चुके हैं और उन्हें युवा प्रतिभाओं की अच्छी पहचान है।