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Ram Temple Donation: 'SIT पर देश की जनता को भरोसा नहीं, हुई सरकारी लीपापोती', जयराम रमेश का हल्लाबोल

जयराम रमेश ने कहा, चार्जशीट के अनुसार CCTV में चढ़ावे की रकम हटाने की 105 घटनाएं सामने आई हैं। एक आरोपी 85 बार रकम हटाते दिखा और अन्य आरोपियों की भी बार-बार भूमिका सामने आई।

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चढ़ावा चोरी में जयराम रमेश के एसआईटी पर आरोप

Ayodhya Donation Row: कांग्रेस ने अयोध्या चंदा चोरी विवाद को लेकर एक बार फिर एसआईटी को निशाने पर लिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेशन ने कहा ,हमने पहले दिन से कहा था कि भगवान श्रीराम के अयोध्या मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच के लिए बनाई गई सरकारी SIT पर देश की जनता को भरोसा नहीं है। अब चार्जशीट में सामने आए तथ्यों ने इस जांच पर और सरकारी लीपापोती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चार्जशीट के अनुसार 4 जून को ₹2.25 लाख की रकम बाथरूम में मिलने का वीडियो चंपत राय को भेजा गया। 5 जून को उन्हें CCTV फुटेज भी दिखाया गया।

आपराधिक कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई?

इसके बावजूद FIR 25 जून को हुई। जब CCTV, बरामदगी और संदिग्ध कर्मचारियों की पहचान सामने आ चुकी थी, तो आपराधिक कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई? इन 21 दिनों में आखिर किसे बचाने और क्या छिपाने का मौका मिला? चार्जशीट के अनुसार CCTV में चढ़ावे की रकम हटाने की 105 घटनाएं सामने आई हैं। एक आरोपी 85 बार रकम हटाते दिखा और अन्य आरोपियों की भी बार-बार भूमिका सामने आई।

उन्होंने लिखा- एसआईटी को पता था कि सब कुछ पता चलने के तीन दिन बाद भी चंपत राय ने चढ़ावा चोरी होने से इंकार किया। फिर भी चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया, वे गवाह क्यों हैं? वे जनता का भरोसा खोने के बावजूद ट्रस्ट में क्यों बने हुए हैं? क्या जिन लोगों पर व्यवस्था की निगरानी और प्रबंधन की जिम्मेदारी थी, उनकी भूमिका की जांच किए बिना चढ़ावा चोरी की पूरी सच्चाई सामने आ सकती है?

जांच 8 आरोपियों तक ही क्यों सीमित रही?

70 से 105 घटनाएं सामने आईं, हजारों डिजिटल संदेशों की जांच हुई, बैंक खातों और संपत्तियों की पड़ताल की बात की गई। फिर भी जांच की पहुंच आठ आरोपियों तक ही क्यों सीमित रही? क्या SIT ने पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय की या सिर्फ छोटे किरदारों तक मामला सीमित कर दिया? और सबसे बड़ा सवाल: क्या इस पूरे मामले के तार भाजपा-आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचते हैं?

भगवान श्री राम के नाम पर आए चढ़ावे की चोरी में असली जिम्मेदारी तय होने तक यह मामला खत्म नहीं माना जा सकता। यह रामभक्तों के विश्वास से जुड़ा गंभीर मामला है। इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए। प्रधानमंत्री जी चुप्पी तोड़ो, नहीं तो इसका मतलब है कि चोरों को आपका संरक्षण प्राप्त है।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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