इस फल का नाम लुकुमा है, जिसे अंग्रेजी में Lucuma campechiana कहा जाता है। इस फल को भारत में भी उगाया जाता है। हालांकि, भारत में इसकी पैदावार बहुत ज्यादा नहीं होती है।
लुकुमा को एगफ्रूट भी कहा जाता है। यह सपोटा फल के परिवार का फल है। यही कारण है कि कई बार इस फल को पीला सपोता भी कह दिया जाता है।
लुकुमा का फल हर साल जून-जुलाई में लगता है। हालांकि, पेड़ पर कुछ फल दिसंबर में भी मौजूद रहते हैं।
भारत में लुकुमा कम ही मात्रा में होता है। लेकिन महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में इसे उगाया जाता है। इसके अलावा ओरोविले में भी इस फल को कुछ गार्डन्स में उगाया जाता है।
लुकुमा को महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट, केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में उगाया जाता है। इसे उगाने के लिए बहुत अधिक मेहनत की आवश्यकता नहीं होती। किसान एक-एक पके हुए फल को पेड़ से तोड़ते हैं, क्योंकि यह सभी एक साथ नहीं पकते।
लुकुमा मूल रूप से मैक्सिको का फल है। माया सभ्यता के लोग 800 ईसा पूर्व भी इस फल का सेवन करते थे। अल-सेल्वाडोर, बेलिज और ग्वाटेमाला में भी यह फल होता है। पेरू और इक्वाडोर में यह लोगों के आहार का अहम हिस्सा है।
लुकुमा फल भारत में कब लाया गया, इस बारे में कोई विशेष जानकारी तो नहीं है। लेकिन माना जाता है कि 1924 में जब यह फल फिलिपीन्स पहुंचा, उसी के आसपास यह फल भारत भी लाया गया होगा।
पका हुआ लुकुमा हरे से गोल्डन कलर का हो जाता है। इसके पीले रंग के कारण ही इसे एगफ्रूट कहते हैं, क्योंकि यह अंडे की जर्दी जैसा दिखता है। इसका टेस्ट भी मसले हुए अंडे की जर्दी की तरह होता है, जिसमें ऊपर से चीनी मिला दी गई हो।
लुकुमा स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत अच्छा होता है। इसमें बड़ी मात्रा में बीटा कैरोटीन होता है, जो आखों की रक्षा करने के साथ ही बालों और त्वचा के लिए भी फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद रैरोटेनॉयड कैंसर, उम्र से संबंधित बीमारियों, डिप्रेशन, सिरदर्द, सीने में जलन और हाई ब्लड प्रेशर के लिए अच्छा होता है। इसमें आयरन, मिनरल भी होते हैं और यह याददाश्त बढ़ाने के साथ ही एनर्जी लेवल और स्ट्रेंग्थ बढ़ाने में भी मददगार होता है।