मंगल ग्रह पर प्राचीन जल निकायों के निशान हैं। लेकिन जब ग्रह ठंडा और शुष्क हो गया तो यह सब कहां चला गया, इसकी पहेली ने वैज्ञानिकों को लंबे समय से उलझन में डाल रखा है। नया अध्ययन शायद इसका जवाब दे। नासा के ‘इनसाइट’ मिशन से भूकंप संबंधी आंकड़ों का उपयोग करते हुए, हमने इस बात के प्रमाण खोजे हैं कि भूकंपीय तरंगें सतह से 5.4 से 8 किलोमीटर नीचे की परत में धीमी हो जाती हैं, जो इन गहराईयों में तरल पानी की मौजूदगी के कारण हो सकता है।
मंगल हमेशा से वैसा बंजर रेगिस्तान नहीं था जैसा हम आज देखते हैं। अरबों साल पहले, नोआचियन और हेस्पेरियन काल (4.1 अरब से 3 अरब साल पहले) के दौरान, नदियों ने घाटियां बनाईं और वहां झीलें चमकती थीं।
गणनाओं से पता चलता है कि ‘लुप्त’ हो चुका पानी इतना है कि यह ग्रह को कम से कम 700 मीटर गहरे और शायद 900 मीटर तक गहरे समुद्र में ढक सकता है।एक परिकल्पना यह है कि गायब पानी सतह में रिस गया। नोआचियन काल के दौरान मंगल ग्रह पर उल्कापिंडों की भारी बारिश हुई थी, जिससे दरारें बन गई होंगी, जिससे पानी भूमिगत हो गया होगा। सतह के पास जमी हुई पानी की परतों के विपरीत सतह के नीचे, गर्म तापमान पानी को तरल अवस्था में रखता होगा।
साल 2018 में, नासा का ‘इनसाइट’ लैंडर सुपर-सेंसिटिव सीस्मोमीटर के साथ ग्रह के अंदरूनी हिस्से की हलचल का पता लगाने के लिए मंगल ग्रह पर उतरा। ‘शियर वेव्स’ नामक एक विशेष प्रकार के कंपन का अध्ययन करके, हमने एक महत्वपूर्ण भूमिगत विसंगति पाई, जिसमें 5.4 और 8 किलोमीटर के गहराई के बीच एक परत है जहां ये कंपन अधिक धीमी गति से होते हैं।
हमने गणना की कि मंगल ग्रह पर ‘एक्वीफायर्स की परत’ में इतना पानी हो सकता है कि यह ग्रह को 520-780 मीटर गहरे वैश्विक महासागर में ढक सके। अंटार्कटिका की बर्फ की चादर में मौजूद पानी से कई गुना ज़्यादा हो सकता है। पानी की यह मात्रा अंतरिक्ष में हुई क्षति, खनिजों में रुके पानी और आधुनिक बर्फ की चोटियों को ध्यान में रखने के बाद, मंगल ग्रह पर ‘लुप्त’ पानी (710-920 मीटर) के अनुमान के अनुरूप है।
यह पानी अधिक जटिल जीवों के लिए भी जीवन रेखा हो सकता है - जैसे कि भविष्य के मानव खोजकर्ता। शुद्ध होने पर, यह पीने का पानी, ऑक्सीजन या रॉकेट के लिए ईंधन प्रदान कर सकता है।
बेशक, दूर के ग्रह पर किलोमीटर गहराई तक ड्रिलिंग करना एक कठिन चुनौती है। हालांकि, मंगल की भूमध्य रेखा के पास एकत्र किए गए हमारे आंकड़ों से अन्य जल-समृद्ध क्षेत्रों की संभावना का भी संकेत मिलता है - जैसे कि यूटोपिया प्लैनिटिया का बर्फीला मिट्टी का जलाशय।