James Webb Space Telescope ने एक ऐतिहासिक खोज की है। वैज्ञानिकों ने पहली बार हमारे सौर मंडल के बाहर किसी युवा तारा प्रणाली में जमी हुई पानी की बर्फ (वॉटर आइस) की पुष्टि की है। (फोटो साभार: NASA, ESA, CSA, STScI, Ralf Crawford (STScI))
वैज्ञानिक कई सालों से यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि क्या दूसरे तारों के आसपास भी पानी की बर्फ मौजूद है। दरअसल, हमारे सौरमंडल में जुपिटर और शनि के चंद्रमाओं, शनि के छल्लों और दूर स्थित काइपर बेल्ट में बर्फ पाई जाती है। (प्रतीकात्मक फोटो साभार: iStock)
अभी तक अन्य तारा प्रणाली में बर्फ की मौजूदगी की पुष्टि नहीं होई थी, लेकिन वैज्ञानिकों की सोच अब बदली है। वैज्ञानिकों ने जेम्स वेब टेलीस्कोप की मदद से HD 181327 तारा प्रणाली में धूल और मलबे की एक डिस्क में जमी हुई पानी की बर्फ खोजी है। (प्रतीकात्मक फोटो साभार: iStock)
पृथ्वी से लगभग 155 प्रकाश वर्ष दूर स्थित HD 181327 सूर्य जैसा तारा है, लेकिन सूर्य की तुलना में काफी युवा है, क्योंकि HD 181327 महज 2.3 करोड़ साल पुराना है, जबकि हमारा सूर्य लगभग 4.6 अरब साल पुराना है। (फोटो साभार: NASA, ESA, CSA, STScI, Ralf Crawford (STScI))
HD 181327 तारे के चारों ओर धूल, पत्थर और बर्फीले टुकड़ों को लगातार टकराव होता रहता है, जिसकी वजह से एक मलबे की परत बनी हुई है। हालांकि, तारे और उसकी डिस्क के बीच एक खाली स्थान भी देखा गया है, जहां पर संभवत: नए ग्रहों का निर्माण हो सकता है, जो अपने रास्ते में आने वाले मलबों को एकत्रित कर रहा हो। (फोटो साभार: NASA, ESA, CSA, STScI, Ralf Crawford (STScI))
HD 181327 तारे के बाहरी हिस्से में लगभग 20 फीसदी से ज्यादा बर्फ की मौजूदगी की पुष्टि हुई, जबकि बीच वाले हिस्से में लगभग 8 फीसदी मिली है। हालांकि, अंदरूनी हिस्से में इसका नामोनिशान तक नहीं मिला, क्योंकि तारे की वजह से वह भाप बन गई होगी। (फोटो साभार: NASA, ESA, CSA, STScI, Ralf Crawford (STScI))
अर्थ डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, पानी की बर्फ ग्रहों के निर्माण में काफी अहम मानी जाती है। बर्फीले टुकड़े आपस में टकराकर छोटे-छोटे कण बनाते हैं, जो समय के साथ एकजुट होकर ग्रहों में तब्दील हो सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी पर भी संभवत: पानी ऐसे ही बर्फीले धूमकेतुओं और एस्टेरॉयड की टकराव से आया था। (फोटो साभार: NASA, ESA, CSA, STScI, Ralf Crawford (STScI))
साल 2008 में Spitzer Space Telescope में सौरमंडल के बाहर बर्फ की मौजूदगी के संकेत दिए थे, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई थी। हालांकि, जेम्स वेब टेलीस्कोप की खोज ने इसकी पुष्टि कर दी। इस स्टडी के वैज्ञानिक चेन शी (Chen Xie) के मुताबिक, यह महज पानी की बर्फ नहीं, बल्कि क्रिस्टलाइन वॉटर आइस है। मतलब ऐसी बर्फ, जो शनि के छल्लों और काइपर बेल्ट में मिलती है। (फोटो साभार: NASA, ESA, CSA, STScI, Ralf Crawford (STScI))