जिस एयर टर्बूलेंस के कारण हवा में ही हिचकोले खाने लगता है प्लेन, जानिए वो कितना है खतरनाक, क्या विमान भी हो सकता है क्रैश?

एयर टर्बूलेंस (Air Turbulence) उस स्थिति को कहते हैं जब विमान या कोई अन्य उड़नशील वस्तु हवा में असमान या उथल-पुथल वाली अवस्था का अनुभव करती है। यह हवा की गति और दिशा में अचानक बदलाव की वजह से होता है। जब विमान किसी टर्बूलेंट एयर जोन में प्रवेश करता है, तो वह झटका महसूस कर सकता है या विमान का संतुलन थोड़ी देर के लिए अस्थिर हो सकता है। यह टर्बूलेंस आमतौर पर कई कारणों से हो सकता है, जैसे: हवा के दबाव में बदलाव: हवा के दबाव में अचानक बदलाव से टर्बूलेंस हो सकता है। गर्म और ठंडी हवा के मेल से भी टर्बूलेंस हो सकता है। जब हवा पहाड़ों या बड़ी संरचनाओं से टकराती है, तो वह असमान रूप से बहने लगती है, जिससे टर्बूलेंस उत्पन्न हो सकता है। जब हवा ऊपर या नीचे की दिशा में तेजी से गति करती है, तो भी यह टर्बूलेंस पैदा कर सकती है।

Authored by: शिशुपाल कुमारUpdated Feb 10 2025, 12:19 IST
मौसम संबंधी टर्बूलेंस (Weather Turbulence)Image Credit : Leonardo.ai & Canva01 / 07

मौसम संबंधी टर्बूलेंस (Weather Turbulence)

विमानों में जो टर्बूलेंस उत्पन्न होता है वो कई बार मौसम की वजह से होता है। जसै थंडरस्टॉर्म के दौरान गरज और तूफान की स्थितियों में हवा का प्रवाह अत्यधिक अस्थिर हो सकता है। इसका परिणाम झटके और अचानक दिशा बदलने के रूप में होता है। कन्वेक्शन के दौरान यह गर्म हवा के ऊपर उठने और ठंडी हवा के नीचे गिरने के कारण होता है, जो अक्सर आसमान में बादल बनाने का कारण बनता है। इसके बादा आता है वर्टिकल टर्बूलेंस यह तब होता है जब हवा एक ऊंचाई से दूसरी ऊंचाई पर तेजी से खींची जाती है। उदाहरण के लिए, एक विमान ऊंचाई बदलते समय, हवा का दबाव और दिशा बदल सकता है, जिससे टर्बूलेंस पैदा होता है।

 माउंटेन वेव टर्बूलेंस (Mountain Wave Turbulence)Image Credit : Leonardo.ai & Canva02 / 07

माउंटेन वेव टर्बूलेंस (Mountain Wave Turbulence)

जब हवा पहाड़ों से टकराती है, तो वह एक तरंग की तरह बहती है और जब विमान इस तरंग के नीचे या ऊपर से गुजरता है, तो टर्बूलेंस उत्पन्न हो सकता है। यह सामान्यत: पहाड़ी इलाकों में ज्यादा देखा जाता है। यह कभी-कभी खतरनाक हो सकता है।

 कैटाबैटिक टर्बूलेंस (Katabatic Turbulence)Image Credit : Leonardo.ai & Canva03 / 07

कैटाबैटिक टर्बूलेंस (Katabatic Turbulence)

यह तब उत्पन्न होता है जब ठंडी हवा उच्च इलाकों से नीचे की ओर बहती है, जैसे हिमालयी क्षेत्रों में। यह हवा के तेज गति और दिशा में बदलाव के कारण होता है, जिससे विमान को झटका महसूस हो सकता है। हिमालय रिजन में ऐसे टर्बूलेंस कभी-कभी खतरनाक साबित होते हैं।

क्लियर एयर टर्बूलेंस या सबसे खतरनाक टर्बूलेंस ( Clear Air Turbulence)Image Credit : Leonardo.ai & Canva04 / 07

क्लियर एयर टर्बूलेंस या सबसे खतरनाक टर्बूलेंस ( Clear Air Turbulence)

क्लियर एयर टर्बूलेंस यह सबसे खतरनाक और अप्रत्याशित टर्बूलेंस प्रकार है, जो आमतौर पर ऊंचाई में होता है, जब मौसम साफ होता है और बादल नहीं होते। यह एक हवा के प्रवाह में अचानक बदलाव के कारण उत्पन्न होता है, और इसका कोई संकेत नहीं होता है, जिससे यह बहुत अप्रत्याशित हो सकता है।

टर्बूलेंस से विमान को कितना खतराImage Credit : Leonardo.ai & Canva05 / 07

टर्बूलेंस से विमान को कितना खतरा

टर्बूलेंस से विमानों को खतरा तो होता है, इसमें कोई शक नहीं है, हालांकि ये ज्यादातर बार यात्रियों को ज्यादा परेशान करता है। इसमें विमान को अचानक ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं हिलने का अनुभव हो सकता है। यह कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनटों तक चल सकता है।

यात्रियों को कितनी असुविधाImage Credit : Leonardo.ai & Canva06 / 07

यात्रियों को कितनी असुविधा

टर्बूलेंस के दौरान विमान के यात्रियों को सीट बेल्ट की जरूरत पड़ सकती है, और कभी-कभी यह डर भी उत्पन्न कर सकता है, हालांकि यह आमतौर पर कोई खतरा नहीं होता। एयर टर्बूलेंस विमान के लिए खतरनाक नहीं होता। विमान डिज़ाइन किए जाते हैं ताकि वे टर्बूलेंस को संभाल सकें, और पायलटों को इस स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण प्राप्त होता है। हालांकि, गंभीर टर्बूलेंस में यात्रियों को चोट लगने का जोखिम हो सकता है, खासकर अगर वे सीट बेल्ट नहीं पहने होते।

टर्बूलेंस के दौरान पायलट की अहम भूमिकाImage Credit : Leonardo.ai & Canva07 / 07

टर्बूलेंस के दौरान पायलट की अहम भूमिका

विमान के पायलट आमतौर पर टर्बूलेंस को संभालने के लिए प्रशिक्षित होते हैं और विमान के डिज़ाइन में भी इस प्रकार के टर्बूलेंस को झेलने की क्षमता होती है। पायलटों को टर्बूलेंस का सही तरीके से सामना करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। वे हमेशा इस प्रकार की स्थिति का अनुमान लगा सकते हैं और आवश्यकतानुसार विमान की ऊंचाई और मार्ग में बदलाव करते हैं। अधिकांश एयरलाइंस अपने पायलटों को टर्बूलेंस के संभावित क्षेत्रों के बारे में पहले से ही सूचित कर देती हैं, ताकि वे सही मार्ग और ऊंचाई का चयन कर सकें।

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