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'एक लाख रुपये कमाने का था सपना' संघर्ष के दिनों को याद कर इमोशनल हुए Vikrant Massey

  • Authored by: अभय
  • Updated Jul 22, 2026, 05:06 PM IST

Vikrant Massey on Struggle Days: एक्टर विक्रांत मैसी ने अभी हाल ही में Zoom को एक इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू के दौरान विक्रांत मैसी ने ओटीटी की दुनिया और अपने सपने को लेकर बात की।

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विक्रांत मैसी ने कही ये बात (Image Source: Zoom TV Youtube)

Vikrant Massey on Struggle Days: बॉलीवुड के फेमस एक्टर विक्रांत मैसी (Vikrant Massey) आज बॉलीवुड और ओटीटी की दुनिया का बड़ा नाम हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं था। Zoom को दिए एक इंटरव्यू में एक्टर ने अपने संघर्ष के दिनों को याद किया और बताया कि एक समय ऐसा भी था, जब वो मुंबई के जुहू इलाके में एक कैफे में काम करते थे। उस दौर में उनका सबसे बड़ा सपना सिर्फ इतना था कि वो हर महीने एक लाख रुपये कमा सकें। इसके अलावा विक्रांत मैसी ने नेटफ्लिक्स (Netflix) को लेकर भी बड़ी बात कही।

ये था विक्रांत मैसी का सपना

एक्टर विक्रांत मैसी एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं। इसकी वजह विक्रांत मैसी का अभी हाल ही में Zoom को दिया इंटरव्यू है। इस दौरान विक्रांत मैसी ने अपने संघर्ष के दिनों पर बात की। Zoom से बात करते हुए विक्रांत मैसी ने कहा, 'सच कहूं तो भगवान मेरे ऊपर हमेशा मेहरबान रहे हैं। एक वक्त था, जब मेरी सबसे बड़ी ख्वाहिश सिर्फ इतनी थी कि महीने के एक लाख रुपये कमाने लगूं। मुझे लगता था कि अगर इतनी कमाई होने लगी, तो जिंदगी सेट हो जाएगी। लेकिन वहां से आज यहां तक का सफर जहां मैं वही काम कर रहा हूं जिसे सबसे ज्यादा पसंद करता हूं, यानी लोगों तक कहानियां पहुंचाना और अब सिर्फ एक एक्टर ही नहीं, उससे बढ़कर भी कुछ योगदान देने की कोशिश कर रहा हूं इससे ज्यादा मैं और क्या मांग सकता हूं।' विक्रांत ने आगे कहा, 'मैं सबसे ज्यादा दर्शकों का शुक्रगुजार हूं। उन्होंने हमेशा मुझ पर भरोसा रखा, मेरा साथ दिया और मेरा इंतजार किया। इंडस्ट्री में मुझे 22 साल हो चुके हैं लेकिन आज भी लोग मुझे उतना ही प्यार देते हैं, मेरे लिए दुआ करते हैं। इससे बड़ी बात मेरे लिए और कुछ नहीं हो सकती।'

'अच्छी फिल्में बन रही हैं, लेकिन लोग थिएटर नहीं जा रहे'

ओटीटी के बढ़ते असर पर बात करते हुए विक्रांत ने कहा कि उनके करियर में नेटफ्लिक्स (Netflix) की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने कहा, 'अगर मेरे बारे में बात करूं, तो कोविड के दौरान नेटफ्लिक्स नहीं होता, तो शायद मेरी कहानी कुछ और होती। उस समय इंडस्ट्री के दोस्त मजाक में कहते थे कि नेटफ्लिक्स पर 'विक्रांत मैसी फिल्म फेस्टिवल' चल रहा है। 'गिन्नी वेड्स सनी', 'हसीन दिलरुबा' और बाद में 'सेक्टर 36' जैसी फिल्में वहां आईं। नेटफ्लिक्स ने हमेशा मेरा साथ दिया। अगर ऐसे प्लेटफॉर्म नहीं होते, तो न जाने कितने टैलेंटेड लोगों को अपना हुनर दिखाने का मौका ही नहीं मिलता।' थिएटर और ओटीटी के बदलते दौर पर विक्रांत ने कहा कि अच्छी फिल्मों की कमी नहीं है, लेकिन अब दर्शकों की देखने की आदत बदल चुकी है। उन्होंने कहा, 'अच्छी फिल्में आज भी बन रही हैं, लेकिन अफसोस की बात ये है कि लोग थिएटर नहीं जा रहे। देखने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। आज के आंकड़े देखें, तो 65 से 70 फीसदी एंटरटेनमेंट लोग अपने करीब 11 इंच के मोबाइल फोन पर ही देख रहे हैं। हम खुद भी पहले की तरह थिएटर नहीं जाते। शायद इसकी कोई एक वजह भी नहीं है, बस यही हमारी आदत बन गई है।'

Abhay
अभयauthor

अभय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एंटरटेनमेंट डेस्क पर चीफ कॉपी एडिटर हैं। टीवी पत्रकारिता में डिप्लोमा हासिल करने वाले अभय मनोरंजन जगत की खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। वे फिल्म, टीवी, ओटीटी और सेलिब्रिटी अपडेट्स को सरल भाषा में और सटीक जानकारी के साथ पेश करने के लिए जाने जाते हैं। अभय अबतक 9,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं। तेजी से बदलती एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में खबरों को पकड़ने, रिसर्च करने और समय पर प्रकाशित करने में उनकी खास दक्षता है।

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