लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, EAST ने 1,066 सेकंड तक सुपर-हॉट प्लाज्मा बनाए रखने में कामयाबी हासिल की। यह रिकॉर्ड 403 सेकंड के पिछले रिकॉर्ड से दोगुना से भी अधिक है। इस दौरान वैज्ञानिकों ने 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस से ज्यादा का प्लाज्मा तापमान हासिल किया।
न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर को 'कृत्रिम सूर्य' का नाम दिया गया। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर सूर्य के सामान तरीके से ही ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। इसमें दो हल्के परमाणुओं को अत्यधिक तापमान और दबाव के माध्यम से मिलाकर एक भारी परमाणु बनाया जाता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती पर बने रिएक्टरों में सूर्य के समान दबाव नहीं होता है। इसी वजह से तो उन्हें बहुत अधिक तापमान में चलाया गया है।
न्यूक्लियर फ्यूजन से लगभग ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन या अत्यधिक मात्रा में परमाणु कचरे के बिना ही असीमित ऊर्जा मिल सकती है। हालांकि, पिछले 70 सालों से इस तकनीक पर काम चल रहा है।
EAST एक मैग्नेटिक कोफाइनमेंट रिएक्टर या टोकामक है जिसे प्लाज्मा को लंबे समय तक जलाने रखने के लिए डिजाइन किया गया है। इस तरह के रिएक्टरों ने कभी भी प्रज्वलन हासिल नहीं किया है, लेकिन नया रिकॉर्ड एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
EAST दुनिया भर में मौजूद कई न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टरों में से एक है, लेकिन वे सभी वर्तमान में जितनी ऊर्जा का उत्पादन करते हैं उससे कहीं ज्यादा का इस्तेमाल कर रहे हैं।