बदल रहा है अलास्का का भूगोल; वैज्ञानिकों ने बताया- क्यों अब पहले से ज्यादा 'खतरनाक' हो गई है जंगलों की आग

अलास्का के सुदूर उत्तरी ढलानों (North Slope) से एक चौंकाने वाली वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने आई है। 'बायोजियोसाइंसेज' जर्नल में छपे एक नए रिसर्च के अनुसार, पिछले 100 सालों में इस क्षेत्र के जंगलों और टुंड्रा में लगी आग पिछले 3,000 सालों में सबसे भीषण रही है। जर्मनी, पोलैंड, ब्रिटेन, रोमानिया और यूनिवर्सिटी ऑफ अलास्का फेयरबैंक्स के वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने पाया कि Climate Change के कारण यह पूरा Ecosystem एक खतरनाक बदलाव से गुजर रहा है।

Authored by: निशांत तिवारीUpdated Feb 14 2026, 14:57 IST
3,000 साल का इतिहास और चेतावनीImage Credit : Canva01 / 07

3,000 साल का इतिहास और चेतावनी

वैज्ञानिकों ने अलास्का के टुंड्रा क्षेत्र में जमीन के अंदर से 'पीट कोर' (मिट्टी के नमूने) निकाले, जो करीब आधा मीटर गहरे थे। इन नमूनों के अध्ययन से पता चला कि ईसा पूर्व 1000 साल से लेकर अब तक के रिकॉर्ड में हालिया आग की घटनाएं सबसे चरम पर हैं। मुख्य शोधकर्ता एंजेलिका फेउर्डियन के अनुसार, यह बदलाव इस बात का संकेत है कि हमारा प्राकृतिक तंत्र बहुत तेजी से बदल रहा है।

मिट्टी की खुदाई से खुले अतीत के राजImage Credit : Canva02 / 07

मिट्टी की खुदाई से खुले अतीत के राज

इस शोध के लिए ब्रूक्स रेंज के उत्तर में नौ अलग-अलग स्थानों से मिट्टी के नमूने लिए गए। इन नमूनों में मौजूद चारकोल (कोयले के अंश), परागकण (Pollens) और पौधों के अवशेषों का विश्लेषण किया गया। 'रेडियोकार्बन डेटिंग' तकनीक के जरिए वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया कि किस सदी में मिट्टी कितनी गीली थी और उस समय वहां कैसी वनस्पति मौजूद थी।

2,000 सालों तक शांत रहा अलास्का का उत्तरी क्षेत्रImage Credit : Canva03 / 07

2,000 सालों तक शांत रहा अलास्का का उत्तरी क्षेत्र

रिकॉर्ड के शुरुआती 2,000 सालों (1000 ईसा पूर्व से 1000 ईस्वी तक) में अलास्का के इन इलाकों में आग लगने की घटनाएं बहुत ही दुर्लभ थीं। 1000 से 1200 ईस्वी के बीच मामूली हलचल जरूर देखी गई, जब मिट्टी सूखनी शुरू हुई थी, लेकिन उसके बाद अगले 700 सालों तक फिर से शांति रही। असली बदलाव की शुरुआत आधुनिक युग के साथ हुई।

1950 के बाद आया आग का 'सैलाब'Image Credit : Canva04 / 07

1950 के बाद आया आग का 'सैलाब'

1900 के आसपास आग की घटनाओं में फिर से बढ़ोतरी शुरू हुई, लेकिन 1950 के बाद तो जैसे रिकॉर्ड ही टूट गए। इस दौरान अलास्का की मिट्टी अपने इतिहास के सबसे सूखे दौर में पहुंच गई। मिट्टी के सूखने और वहां झाड़ियों (Woody Vegetation) के बढ़ने के कारण आग को ज्यादा ईंधन मिलने लगा, जिससे आग की तीव्रता और दायरा दोनों बढ़ गए।

सैटेलाइट डेटा और चारकोल का मेलImage Credit : Canva05 / 07

सैटेलाइट डेटा और चारकोल का मेल

वैज्ञानिकों ने केवल पुरानी मिट्टी पर ही भरोसा नहीं किया, बल्कि उसे आधुनिक सैटेलाइट तस्वीरों से भी मिलाया। सैटेलाइट डेटा ने पुष्टि की कि 1960, 1990 और 2000 के दशक में इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा आग लगी। यह तुलना साबित करती है कि हालिया दशकों में आग लगने की आवृत्ति (Frequency) काफी बढ़ गई है।

पहले से ज्यादा विनाशकारी हुई आगImage Credit : Canva06 / 07

पहले से ज्यादा विनाशकारी हुई आग

यूनिवर्सिटी ऑफ अलास्का के रैंडी फुलवेबर ने एक डराने वाली बात साझा की। उन्होंने बताया कि हालिया आग इतनी भीषण और गर्म होती है कि वह पीछे चारकोल के अवशेष भी कम छोड़ रही है। इसका मतलब है कि आग अब पहले से कहीं ज्यादा ईंधन जला रही है और जमीन की गहराई तक नुकसान पहुंचा रही है।

टूलिक फील्ड स्टेशन का योगदानImage Credit : Canva07 / 07

टूलिक फील्ड स्टेशन का योगदान

यह महत्वपूर्ण शोध यूनिवर्सिटी ऑफ अलास्का फेयरबैंक्स के 'टूलिक फील्ड स्टेशन' की वजह से संभव हो पाया। यहां दुनिया भर के विशेषज्ञ एक साथ मिलकर काम करते हैं। फुलवेबर के अनुसार, इस स्टेशन पर रिमोट सेंसिंग और पुराने पारिस्थितिकी तंत्र (Paleoecology) के विशेषज्ञों के मेल ने ही इतने बड़े रहस्य से पर्दा उठाने में मदद की है।

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