एक्सपर्ट का कहना है कि रूस का कमचटका जो कि भूकंप का केंद्र था, वह प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फॉयर' के समीप स्थित है। दुनिया के 80 प्रतिशत भूकंप इसी पैसिफिक 'रिंग्स ऑफ फायर' में आते हैं। भूकंप के लिहाज से पृथ्वी का यह जोन बेहत संवेदनशील और खतरनाक माना जाता है। (तस्वीर-AP)
एक्सपर्ट का कहना है कि पृथ्वी की ऊपरी सतह कई परतों में बंटी हुई है, इस ऊपरी सतह को टेक्टोनिक प्लेट्स के नाम से जाना जाता है। ये प्लेट्स आपस में दरकती रहती हैं और इनमें हलचल होती रहती है। इनमें हलचल और इनके दरकने से ऊर्जा निकलती है और यह ऊर्जा भूकंप के रूप में सामने आती है। (तस्वीर-AP)
पैसिफिक 'रिंग ऑफ फायर' में इन टेक्टोनिक प्लेट्स की बहुलता है और पैसिफिक इन प्लेट्स से घिरा हुआ है। इस इलाके में आने वाले भूकंप की संख्या और ज्वालामुखी विस्फोट के चलते इसे 'रिंग ऑफ फॉयर' कहा जाता है। ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक इस रिंग के आस-पास ही दुनिया के 80 प्रतिशत भूकंप आते हैं। (तस्वीर-AP)
रूस का कमचटका, जापान, फिलिपींस और अमेरिका का पैसिफिक तट का ज्यादातर हिस्सा इन्हीं प्लेटों के समीप हैं। बुधवार सुबह कमचटका में आया भूकंप तीव्रता में विश्व का छठवां सबसे बड़ा भूकंप था। इससे पहले बड़ी तीव्रता वाले भूकंप चिली और इक्वाडोर में आए थे। (तस्वीर-AP)
पांचवां सबसे बड़ा भूकंप जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 9 थी वह 1952 में कमचटका में ही आया था। इस भूकंप के आने के बाद दक्षिणी प्रायद्वीपों में 12 मीटर ऊंची सुनामी की लहरें उठी थीं। (तस्वीर-AP)
'रिंग ऑफ फॉयर' की आकृति घोड़े के नाल की तरह बनती है। यह क्षेत्र न्यूजीलैंड, दक्षिणपूर्व एशिया, जापान, अलास्का और उत्तरी एवं दक्षिण अमेरिका के पश्चिम तट से गुजरता है। (तस्वीर-AP)
इसी रिंग के आस-पास 2011में जापान में, 1960 में चिली में, 2004 में हिंद महासागर में और 1964 में अलास्का में आए भूकंप और सुनामी से भारी तबाही मची। (तस्वीर-AP)