राफेल M की खासियत है क्योंकि यह STOBAR टेक्नोलॉजी (Short Take-Off But Arrested Recovery) से लैस है और मजबूत लैंडिंग गियर के साथ AESA रडार और Spectra वॉरफेयर सिस्टम से युक्त है। इसमें एयर टू एयर फ्यूलिंग की भी सुविधा है।
राफेल एम जेट मिलने से मौजूदा तस्वीर बदलने की उम्मीद है। राफेल जेल मिलने के बाद इन्हें भारतीय जरूरतों को पूरा करने के लिए अनुकूलित किया जाएगा। इनकी तैनाती आईएनएस विक्रांत पर होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि राफेल मिलने के बाद नौसेना की ताकत कई गुणा बढ़ जाएगी। इस सौदे के लिए पहले फ्रांस के रक्षा मंत्री 27 अप्रैल को भारत आने वाले थे, लेकिन कुछ निजी कारणों से उनका दौरा रद्द हो गया। लेकिन इससे सौदे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सोमवार को 'सरकार-से-व्यापार' समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) ने नौसेना के लिए फ्रांस से 26 राफेल-एम लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी है। हाल ही में मिली इस मंजूरी के बाद अब यह डील होने जा रही है। राफेल की डील पर हस्ताक्षर होने के बाद भारतीय नौसेना को राफेल (एम) फाइटर जेट की डिलीवरी 2028-29 में शुरू होगी। वर्ष 2031-32 तक नौसेना को सभी विमानों की आपूर्ति कर दी जाएगी।
यह नौसेना के लिए पहला बड़ा लड़ाकू विमान अपग्रेड होगा। इससे भारतीय नौसेना किसी भी खतरे का मुकाबला करने के लिए और अधिक सशक्त बनेगी। जानकारी के मुताबिक, फ्रांस के साथ होने वाले राफेल-एम लड़ाकू विमान के इस सौदे में बेड़े के रखरखाव, रसद सहायता, कर्मियों के प्रशिक्षण, ऑफसेट दायित्वों के तहत घटकों के घरेलू विनिर्माण के लिए एक व्यापक पैकेज भी शामिल होगा। सौदा तय होने के उपरांत अगले कुछ वर्षों में फ्रांस द्वारा भारतीय नौसेना के लिए इन फाइटर जेट की डिलीवरी की जाएगी।
नौसेना को मिलने वाले 26 राफेल मरीन फाइटर जेट में से 22 सिंगल-सीटर होंगे जबकि चार ट्विन-सीटर वेरिएंट के ट्रेनिंग विमानों की डिलीवरी भी की जाएगी। इन विमानों के शामिल होने के बाद नौसेना की समुद्री हमले की क्षमताओं को मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना के पास भी राफेल विमानों के बेड़े हैं।
ये एडवांस नेवल वर्जन के लड़ाकू विमान INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर्स पर तैनात किए जाएंगे। सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने इस महीने की शुरुआत में इस सौदे को मंजूरी दे दी थी। मिग-29के (MiG-29K) लड़ाकू विमानों के मौजूदा बेड़े ने रखरखाव समस्या और कई तकनीकी दिक्कतों के कारण भरोसेमंद साबित नहीं हो रही है।
राफेल एम जेट आईएनएस विक्रांत से संचालित होंगे और मौजूदा मिग-29के बेड़े की मदद करेंगे। भारतीय वायु सेना पहले से ही 2016 में हस्ताक्षरित एक अलग सौदे के तहत हासिल किए गए 36 राफेल विमानों का बेड़ा संचालित करती है। ये विमान अंबाला और हासीमारा में स्थित हैं। नए सौदे से भारत में राफेल जेट की कुल संख्या 62 हो जाएगी, जिससे देश के 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के बेड़े में अहम बढ़ोतरी होगी।