पाकिस्तान का काल बनकर गरजेगा 'राफेल मरीन', समंदर से करेगा दुश्मन पर प्रहार

भारत सरकार और फ्रांस के बीच एक बड़ा रक्षा सौदा हुआ है जिसके तहत भारत को फ्रांस से 26 राफेल-एम लड़ाकू विमान मिलेंगे। ये सौदा कुल 63 हजार करोड़ रुपये का है। लड़ाकू विमान मिलने के बाद भारतीय नौसेना ताकत बढ़ जाएगी और दुश्मनों से निपटना आसान होगा। इसके तहत भारतीय नौसेना को 22 सिंगल-सीटर और 4 ट्विन-सीटर राफेल M (Marine) फाइटर जेट्स मिलेंगे। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद नौसेना ने दुश्मनों को कड़ा संदेश देते हुए एक महत्वपूर्ण मिसाइल परीक्षण भी किया था। यह मिसाइल परीक्षण नौसेना ने अपने डिस्ट्रॉयर शिप आईएनएस सूरत से अरब सागर में किया था। नौसेना ने मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल दागी थी।

Authored by: संजीव कुमार दुबेUpdated Apr 28 2025, 15:47 IST
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कई खूबियों से लैस

राफेल M की खासियत है क्योंकि यह STOBAR टेक्नोलॉजी (Short Take-Off But Arrested Recovery) से लैस है और मजबूत लैंडिंग गियर के साथ AESA रडार और Spectra वॉरफेयर सिस्टम से युक्त है। इसमें एयर टू एयर फ्यूलिंग की भी सुविधा है।

 बदल जाएगी तस्वीरImage Credit : PHOTO CURTESY- (dassault-aviation.com)02 / 07

बदल जाएगी तस्वीर

राफेल एम जेट मिलने से मौजूदा तस्वीर बदलने की उम्मीद है। राफेल जेल मिलने के बाद इन्हें भारतीय जरूरतों को पूरा करने के लिए अनुकूलित किया जाएगा। इनकी तैनाती आईएनएस विक्रांत पर होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि राफेल मिलने के बाद नौसेना की ताकत कई गुणा बढ़ जाएगी। इस सौदे के लिए पहले फ्रांस के रक्षा मंत्री 27 अप्रैल को भारत आने वाले थे, लेकिन कुछ निजी कारणों से उनका दौरा रद्द हो गया। लेकिन इससे सौदे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सोमवार को 'सरकार-से-व्यापार' समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे।

26 राफेल-एम लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी​Image Credit : PHOTO CURTESY- (dassault-aviation.com)03 / 07

26 राफेल-एम लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी​

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) ने नौसेना के लिए फ्रांस से 26 राफेल-एम लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी है। हाल ही में मिली इस मंजूरी के बाद अब यह डील होने जा रही है। राफेल की डील पर हस्ताक्षर होने के बाद भारतीय नौसेना को राफेल (एम) फाइटर जेट की डिलीवरी 2028-29 में शुरू होगी। वर्ष 2031-32 तक नौसेना को सभी विमानों की आपूर्ति कर दी जाएगी।

आसमान से लेकर पाताल तक की निगरानीImage Credit : PHOTO CURTESY- (dassault-aviation.com)04 / 07

आसमान से लेकर पाताल तक की निगरानी

यह नौसेना के लिए पहला बड़ा लड़ाकू विमान अपग्रेड होगा। इससे भारतीय नौसेना किसी भी खतरे का मुकाबला करने के लिए और अधिक सशक्त बनेगी। जानकारी के मुताबिक, फ्रांस के साथ होने वाले राफेल-एम लड़ाकू विमान के इस सौदे में बेड़े के रखरखाव, रसद सहायता, कर्मियों के प्रशिक्षण, ऑफसेट दायित्वों के तहत घटकों के घरेलू विनिर्माण के लिए एक व्यापक पैकेज भी शामिल होगा। सौदा तय होने के उपरांत अगले कुछ वर्षों में फ्रांस द्वारा भारतीय नौसेना के लिए इन फाइटर जेट की डिलीवरी की जाएगी।

​समुद्री हमले की क्षमताओं को मजबूती मिलेगी​Image Credit : PHOTO CURTESY- (dassault-aviation.com)05 / 07

​समुद्री हमले की क्षमताओं को मजबूती मिलेगी​

नौसेना को मिलने वाले 26 राफेल मरीन फाइटर जेट में से 22 सिंगल-सीटर होंगे जबकि चार ट्विन-सीटर वेरिएंट के ट्रेनिंग विमानों की डिलीवरी भी की जाएगी। इन विमानों के शामिल होने के बाद नौसेना की समुद्री हमले की क्षमताओं को मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना के पास भी राफेल विमानों के बेड़े हैं।

खास तकनीक का मिलेगा लाभImage Credit : PHOTO CURTESY- (dassault-aviation.com)06 / 07

खास तकनीक का मिलेगा लाभ

ये एडवांस नेवल वर्जन के लड़ाकू विमान INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर्स पर तैनात किए जाएंगे। सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने इस महीने की शुरुआत में इस सौदे को मंजूरी दे दी थी। मिग-29के (MiG-29K) लड़ाकू विमानों के मौजूदा बेड़े ने रखरखाव समस्या और कई तकनीकी दिक्कतों के कारण भरोसेमंद साबित नहीं हो रही है।

​आईएनएस विक्रांत से होंगे संचालित होंगे संचालित​Image Credit : PHOTO CURTESY- (dassault-aviation.com)07 / 07

​आईएनएस विक्रांत से होंगे संचालित होंगे संचालित​

राफेल एम जेट आईएनएस विक्रांत से संचालित होंगे और मौजूदा मिग-29के बेड़े की मदद करेंगे। भारतीय वायु सेना पहले से ही 2016 में हस्ताक्षरित एक अलग सौदे के तहत हासिल किए गए 36 राफेल विमानों का बेड़ा संचालित करती है। ये विमान अंबाला और हासीमारा में स्थित हैं। नए सौदे से भारत में राफेल जेट की कुल संख्या 62 हो जाएगी, जिससे देश के 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के बेड़े में अहम बढ़ोतरी होगी।

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