'न हम भूलते हैं और न माफ करते हैं'; मोसाद का ऐसा ऑपरेशन, जो दुश्मनों पर कहर बनकर बरपा

Mossad Operation: इजरायल पिछले सात अक्टूबर से हमास के साथ युद्ध लड़ रहा है और चुन-चुनकर हमास के लड़ाकों को मौत के घाट उतार रहा है, लेकिन क्या आपको पता है कि इजरायल अपने दुश्मनों को कभी माफ नहीं करता है। इजरायल की खूफिया एजेंसी (Mossad) मोसाद दुनियाभर में अपने सफल ऑपरेशन्स को अंजाम देने के लिए जानी जाती है। अगर मोसाद किसी ऑपरेशन की जिम्मेदारी अपने कंधे पर ले लें तो फिर उसका सफल होना तय है तो चलिए आज हम मोसाद के एक खुफिया ऑपरेशन- 'ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड' पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

Slideshow/s by: अनुराग गुप्ताUpdated Jul 25 2024, 13:53 IST
ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड01 / 06

ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड

जर्मनी के म्यूनिख शहर में साल 1972 में ओलंपिक खेलों का आयोजन हुआ था। इस दौरान दुनियाभर के खिलाड़ी म्यूनिख में एकत्रित हुए। इस बीच, फलस्तीनी चरमपंथी दल ब्लैक सेप्टेम्बर, जिन्हें ब्लैक सितंबर के नाम से भी जाना जाता है, ने इजरायल के 11 खिलाड़ियों को बंधक बना लिया।

इजरायली खिलाड़ियों की निर्मम हत्या02 / 06

इजरायली खिलाड़ियों की निर्मम हत्या

नौवें महीने की पांच तारीख को खिलाड़ी म्यूनिख ओलंपिक विलेज में सो रहे थे। तभी अचानक अंधाधुंध गोलियां चलने की आवाज आने लगी। चरमपंथियों ने इजरायली खिलाड़ियों को बंधक बना लिया और फिर उनकी निर्मम हत्या कर दी। इस दौरान 11 इजरायली और एक जर्मन पुलिस अधिकारी की मौत हो गई।

आगबबूला इजरायल03 / 06

आगबबूला इजरायल

इजरायली खिलाड़ियों की हत्या से इजरायल में काफी रोष था। ऐसे में घटना के दो दिन बाद इजरायल ने सीरिया और लेबनान में फलस्तीनी चरमपंथियों के 10 ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। हालांकि, एयरस्ट्राइक के बाद एक कमेटी का गठन किया गया जिसमें कत्लेआम के शामिल लोगों की सूची बनाई गई और मोसाद को इन्हें मारने का जिम्मा सौंपा गया।

कब शुरू हुआ ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड?04 / 06

कब शुरू हुआ ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड?

ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड की शुरुआत अक्टूबर 1972 में हुई। मोसाद ने हमले की जिम्मेदारी लेने वाले ब्लैक सिंतबर के सदस्यों को मध्य पूर्व देशों से लेकर पूरे यूरोप तक में ढूंढ-ढूंढकर मौत के घाट उतारा। 16 अक्टूबर, 1972 को मोसाद के खुफिया एजेंटों ने रोम में रह रहे पहले फलस्तीनी को निशाना।

मोसाद का अनोखा अंदाज05 / 06

मोसाद का अनोखा अंदाज

ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड की कहानी शायद ही कोई भूल पाए, क्योंकि मोसाद के एजेंट हत्यारों को मारने से पहले एक नोट और गुलदस्ता भेजते थे। जिसमें लिखा होता था- 'न हम भूलते हैं और न माफ करते हैं'। साथ ही हत्यारों को 11 गोलियां मारते थे। यह एक खास तरह का मैसेज होता था, जिससे बाकी के हत्यारे थर-थर कांपते थे और खुद को नजरबंद कर लेते थे।

20 साल तक चला ऑपरेशन06 / 06

20 साल तक चला ऑपरेशन

मोसाद का ऑपरेशन रैथ ऑफ गॉड यानी भगवान का कहर दुनियाभर में 20 साल तक चला। मोसाद के खुफिया एजेंटों ने प्रोटोकॉल की परवाह किए बगैर एक-एक हत्यारे को मौत के घाट उतार दिया।

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