मालगाड़ियों के पीछे कुछ ऐसे डिब्बे जुड़े होते हैं जिनमें न बैठने की जगह है, न बाहर देखने की खिड़की और न ही चढ़ने के लिए कोई दरवाजा।आखिर ये डिब्बे यहां क्या कर रहे हैं? क्या ये वाकई 'भूतिया' बोगियां हैं या इसके पीछे है कोई बड़ा लॉजिक?
इसे भारतीय रेलवे का स्मार्ट जुगाड़ कहते हैं। पुराने ICF पैसेंजर कोच को मॉडिफाई करके Sealed मालगाड़ी बनाई जाती है जो अंदर से पूरी तरह बंद होती है।
भारतीय रेल विभाग करीब 25 साल पूरे हो जाने के बाद ICF कोच को पैसेंजर ट्रेन से हटा देता है। रिटायर कोच को Newly Modified Goods रेक के नाम से ऑटो कैरियर के तौर पर इस्तेमाल होता है।
कोच को NMG वैगन बनाने के प्रक्रिया में उसके भीतर से सभी सीटें, लाइटें और पंखों को हटा दिया जाता है और इसकी मजबूती को बढ़ाने के लिए लोहे की पट्टियां का इस्तेमाल किया जाता है।
कोच के सभी खिड़की और दरवाजों को लॉक करने के बाद कोच के पिछले हिस्से में दरवाजा बनाया जाता है ताकि आसानी से सामान लोड या अनलोड किया जा सके।
न्यू मॉडिफाइड गुड्स वैगन को ऐसे तैयार करते हैं, ताकि इसमें कार, ट्रैक्टर और मिनी ट्रक जैसे वाहनों को आसानी से लोड और अनलोड किया जा सके फिर यह रेलवे का चलता फिरता सुरक्षित गोदाम हो जाता है।
न्यू मॉडिफाइड गुड्स ट्रेन महंगी कारें, ट्रैक्टर, जीप, मिनी ट्रक आदि को लेकर जाती है। चोरी की आशंका को रोकने के लिए Windows और Doors लोहे से सील कर दिए जाते हैं।