भारतीय तटरक्षक बल की निगरानी क्षमता में हुआ जबर्दस्त इजाफा, ICG में शामिल हुए 2 डोर्नियर 228 एयरक्राफ्ट

Dornier 228 aircraft inducted in Indian Coast Guard: भारत की सामुद्रिक सुरक्षा में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। भारतीय तटरक्षक बल (ICG) को 19 जनवरी को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से स्टेट ऑफ द आर्ट दो डोर्नियर 228 एयरक्राफ्ट मिले हैं। HAL ने ये दोनों निगरानी विमान अपने कानपुर स्थित ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट डिविजन में सौंपे। ये दोनों विमान आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल के तहत तैयार हुए हैं। इन विमानों को सौंपे जाने वाले समारोह का आयोजन कोस्ट गार्ड हेडक्वार्टर (एविएशन) के डिप्टी डाइरेक्टर जनरल की मौजूदगी में हुआ। (तस्वीर-@IndiaCoastGuard)

Produced by: आलोक कुमार रावUpdated Jan 21 2026, 09:51 IST
सेंसर और आधुनिक एवियोनिक्स से लैसImage Credit : PTI/ANI01 / 07

सेंसर और आधुनिक एवियोनिक्स से लैस

ये डोर्नियर 228 विमान उन्नत सेंसर और आधुनिक एवियोनिक्स से लैस हैं, जिनमें पूर्ण ग्लास कॉकपिट, एकीकृत मिशन प्रबंधन प्रणाली तथा समुद्री निगरानी और टोही अभियानों के लिए विशेष रूप से अनुकूलित भूमिका-आधारित उपकरण शामिल हैं। (तस्वीर-@IndiaCoastGuard)

निगरानी क्षमता में होगा इजाफाImage Credit : PTI/ANI02 / 07

निगरानी क्षमता में होगा इजाफा

ये भारतीय तटरक्षक बल की भारत की विशाल तटरेखा, विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और द्वीपीय क्षेत्रों की अधिक निरंतरता, सटीकता और तेज प्रतिक्रिया के साथ निगरानी करने की क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाते हैं।

खुफिया जानकारी भी एकत्र करने में सक्षमImage Credit : PTI/ANI03 / 07

खुफिया जानकारी भी एकत्र करने में सक्षम

बहु-भूमिका समुद्री अभियानों के लिए डिजाइन किए गए ये विमान तटीय निगरानी, प्रदूषण नियंत्रण, खोज एवं बचाव, समुद्री कानून प्रवर्तन और वास्तविक समय खुफिया जानकारी एकत्र करने जैसे कार्यों में तैनात किए जाएंगे।

तटरक्षक बल की परिचालन का होगा विस्तारImage Credit : PTI/ANI04 / 07

तटरक्षक बल की परिचालन का होगा विस्तार

इनकी कम दूरी में उड़ान भरने और उतरने (शॉर्ट टेक-ऑफ एंड लैंडिंग) की क्षमता छोटे और दूरस्थ हवाई पट्टियों से संचालन को संभव बनाती है, जिससे द्वीपीय क्षेत्रों और अग्रिम इलाकों में तटरक्षक बल की परिचालन पहुंच का विस्तार होगा।

​75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरणImage Credit : PTI/ANI05 / 07

​75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण

75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरणों के साथ, डोर्नियर 228 रक्षा विमानन में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों का एक अत्यंत सफल उदाहरण है। इन विमानों में लगे महत्वपूर्ण मिशन सिस्टम —जिनमें सेंसर, एवियोनिक्स उप-प्रणालियां और मिशन कंप्यूटर शामिल हैं।

ये देश में ही डिजाइन, विकसित और एकीकृत किए गएImage Credit : PTI/ANI06 / 07

ये देश में ही डिजाइन, विकसित और एकीकृत किए गए

ये देश में ही डिजाइन, विकसित और एकीकृत किए गए हैं। स्वदेशीकरण का यह उच्च स्तर न केवल भारत के एयरोस्पेस विनिर्माण आधार को मजबूत करता है, बल्कि दीर्घकालिक रखरखाव, तेज उन्नयन और स्पेयर व समर्थन के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता को भी कम करता है।

​HAL की भूमिका बढ़ीImage Credit : PTI/ANI07 / 07

​HAL की भूमिका बढ़ी

यह समावेशन सैन्य परिवहन और निगरानी विमानों के लिए एक सिस्टम इंटीग्रेटर के रूप में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की बढ़ती भूमिका को भी सुदृढ़ करता है। कानपुर स्थित HAL इकाई भारत के हल्के परिवहन और समुद्री गश्ती बेड़े के निर्माण, उन्नयन और जीवनचक्र समर्थन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर चुकी है।

End of Photo Gallery
Subscribe to our daily Newsletter!