समाचार एजेंसी एएनआई ने रक्षा अधिकारियों के हवाले से बताया कि सेना के लिए 'क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम' QRSM के तीन रेजिमेंट खरीदने के लिए रक्षा मंत्रालय जल्द ही प्रस्ताव तैयार करने वाला है। इनकी तैनाती पश्चिमी और उत्तरी सीमा दोनों जगहों पर होगी।
खास बात यह है कि QRSAM का निर्माण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने किया है। यह डिफेंस सिस्टम बहुत ही गतिशील है। रक्षा अधिकारियों ने इस सिस्टम की खूबियां गिनाते हुए बताया कि यह सिस्टम चलते हुए भी अपने लक्ष्यों को ढूंढ और उन्हें ट्रैक कर सकता है। यही नहीं, बहुत कम समय के लिए रुकते हुए यह लक्ष्य पर फायर कर सकता है।
QRSM की रेंज करीब 30 किलोमीटर है। यह सिस्टम MRSAM और आकाश के मौजूद संस्करणों के पूरक के तौर पर काम करेगा। रात और दिन के समय इस डिफेंस सिस्टम का व्यापक परीक्षण हुआ है और इसकी ऑपरेशनल क्षमताओं को आंका गया है।
अधिकारियों का कहना है कि रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक जून के चौथे सप्ताह में हो सकती है। बता दें कि पाकिस्तान के साथ चार दिनों तक चले संघर्ष में भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने शानदार काम किया। पाकिस्तान की तरफ से आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया गया।
सेना के एयर डिफेंस सिस्टम को नए रडार, बहुत छोटी दूर वाले एयर डिफेंस सिस्टम, जैमर और लेजर आधारित सिस्टम भी मिलने वाले हैं। खासकर ये सिस्टम चीन और तुर्किये निर्मित ड्रोन से निपटने में सक्षम होंगे।