कामत का कहना है कि जाहिर तौर पर इन मिसाइलों की रेंज अधिक होगी। ये सभी मिसाइलें अपने विकास के अलग-अलग चरणों में हैं। हमें लगता है कि इन सभी मिसाइलों को अगले तीन से चार सालों में सेना में शामिल कर लिया जाएगा।
कामत ने आगे कहा कि डीआरडीओ हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों की एक पूरी श्रृंखला पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। ये मिसाइलें हैं-NGARM (न्यू जेनरेशन एंटी रेडिएशन मिसाइल), रुद्रम-2, रुद्रम-3 और रुद्रम-4।
हाइपरसोनिक मिसाइलों की रफ्तार ध्वनि की रफ्तार से पांच गुना अधिक होती है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल है जबकि रुद्रम हाइपरसोनिक मिसाइल होगी। रुद्रम-1 सुपरसोनिक मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता 200 किलोमीटर है। यह दुश्मन के रडार, संचार तंत्र को बर्बाद करने में सक्षम होगी।
रुदम-2 हाइपरसोनिक मिसाइल होगी। इसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर की होगी। यह अधिक दूरी तक सटीकता के साथ मार कर सकेगी। जबकि रुद्रम-3 की मारक क्षमता 500 किलोमीटर से ज्यादा होगी।
रुद्रम-4 वजन में अपने अन्य संस्करणों से हल्की होगा। इसकी रफ्तार मैक -5 से ज्यादा हो सकती है। अडवांस एयर डिफेंस सिस्टम को भी यह चकमा दे सकती है। इसे पकड़ पाना एक तरीके से नामुमकिन होगा। इसे सुखोई , मिराज, राफेल में भी लगाया जा सकता है।