लोंगेवाला की लड़ाई (Longewala Battle) 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटना थी। यह युद्ध राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित लोंगेवाला पोस्ट के पास हुआ था। इस लड़ाई को भारतीय सेना के वीरता और साहस के एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में जाना जाता है। 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध का माहौल था। पाकिस्तान ने भारत के पूर्वी हिस्से (अब बांग्लादेश) में उत्पन्न हुई स्थिति का फायदा उठाने के लिए पश्चिमी मोर्चे पर आक्रमण करने की योजना बनाई। पाकिस्तान के सैन्य आक्रमण का मुख्य उद्देश्य भारतीय सीमा पर कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्र प्राप्त करना था, खासकर पश्चिमी राजस्थान में स्थित भारतीय किलेबंदी क्षेत्रों को।
लोंगेवाला पोस्ट जैसलमेर के पास स्थित एक छोटी भारतीय सीमा चौकी थी। यह चौकी पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र से महज कुछ किलोमीटर दूर थी। पाकिस्तान ने अपनी अग्रिम टैंक और पैदल सेना को इस पोस्ट के पास भेजा, ताकि भारत के पश्चिमी क्षेत्र में घुसपैठ की जा सके। पाकिस्तान का उद्देश्य इस क्षेत्र पर कब्जा करना और भारतीय रक्षा प्रणाली को ध्वस्त करना था। पाकिस्तान की सेना ने भारतीय सीमा के भीतर प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना की तैनाती और रणनीतिक तैयारी ने इसे मुश्किल बना दिया।
4 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान की 51वीं पैदल सेना और 10 डिवीजन के तहत 45 से ज्यादा टैंक और भारी सैन्य बलों ने लोंगेवाला पोस्ट पर हमला किया। इसमें एक फील्ड रेजिमेंट और दो आर्टिलरी बैटरी भी शामिल थी। पाकिस्तान ने गुपचुप तरीके से यह हमला बोला था।
जब पाकिस्तानी सेना लोंगेवाला में आक्रमण करने के लिए पहुंची तो तब वहां सिर्फ 120 भारतीय जवान थे। लोंगेवाला पोस्ट पर 12वीं इंफ्रेंट्री डिविजन की 23 पंजाब कंपनी-A तैनात थी, जिसका नेतृत्व मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी कर रहे थे। लोंगेवाला में 120 जवान, 2 मीडियम मशीन गन, 81 मिमी के दो मोर्टार और 2 आरसीएल गन तैनात था।
पाकिस्तान जैसे ही सेना और टैंकों के साथ भारतीय सीमा में घुसा, मेजर चांदपुरी ने उन्हें आने दिया। पाकिस्तानी सेना गफलत में रही और आगे आती रही। भारतीय सेना ने एक अद्भुत योजना बनाई। यह सुनिश्चित किया गया कि पाकिस्तानी आक्रमणकारी भारतीय सीमा में प्रवेश करें, ताकि भारतीय सैनिक उन्हें घेरकर पूरी ताकत से पलटवार कर सकें। वे जानबूझकर पाकिस्तानी सेना को पोस्ट के करीब लाने में कामयाब रहे और जब पाकिस्तानी सैनिक भारतीय इलाके में पहुंचे तो उन्हें घेरकर हमला कर दिया गया।
लोंगेवाला में जब पाकिस्तानी सेना घुसी तो वो रात का समय था। मेजर चांदपुरी ने वायुसेना से मदद मांगी, तब वायुसेना के पास जो विमान थे, वो रात के अंधेरे में ऑपरेशन को अंजाम नहीं दे सकते थे, रात भर मेजर चांदपुरी के सैनिकों ने पाकिस्तानियों को रोके रखा और फिर सुबह होते ही भारतीय वायुसेना के हंटर विमानों ने धावा बोल दिया। एक के बाद एक टैंक हवा में उछलते रहे और मिट्टी में मिलते रहे। भारतीय वायुसेना ने लोंगेवाला में पाकिस्तानी सेना के लगभग 36 टैंकों को नष्ट कर दिया, जिससे पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान हुआ और वो भाग खड़े हुए।
लोंगेवाला लड़ाई में पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ, जबकि भारतीय सेना ने अपनी सीमित संख्या और संसाधनों के बावजूद शानदार जीत हासिल की। पाकिस्तान के लगभग टैंक नष्ट हो गए और उनकी कई सैन्य गाड़ियां भी तबाह हो गईं। भारतीय सेना ने लोंगेवाला को सुरक्षित रखा और पाकिस्तान के आक्रमण को नाकाम कर दिया। लोंगेवाला की एक ही लड़ाई में पाकिस्तान के 200 सैनिक मारे गए, 36 टैंक नष्ट हो गए और 500 पाकिस्तानी वाहन नष्ट हो गए।