केवल 8 घंटे सोना ही काफी नहीं है, नींद की गुणवत्ता सबसे ज्यादा मायने रखती है। अगर रात में आपकी नींद बार-बार टूटती है या आप गहरी नींद नहीं लेते, तो शरीर की मरम्मत पूरी तरह से नहीं हो पाती। यही वजह है कि सुबह उठने पर भी शरीर थका हुआ महसूस करता है।
विटामिन डी, विटामिन बी12, आयरन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों की कमी से शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह और सेल्स की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। एक हेल्थ सर्वे के मुताबिक, बड़ी संख्या में कामकाजी लोग विटामिन की कमी का शिकार हैं, जिससे वे लगातार सुस्ती महसूस करते हैं।
पानी की कमी हमारे मेटाबॉलिज्म और मानसिक सतर्कता को भी प्रभावित करती है। रातभर बिना पानी के रहने के बाद अगर आप दिन में भी सही मात्रा में तरल पदार्थ नहीं लेते, तो सिरदर्द, भारीपन और सुस्ती महसूस होना स्वाभाविक है।
देर रात भारी भोजन करना, मीठा खाना या फिर बहुत अधिक रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन रात के समय ब्लड शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव लाता है। जब शुगर का स्तर तेजी से गिरता या बढ़ता है, तो शरीर को उसे संतुलित करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है, जिससे नींद में खलल पड़ता है और सुबह थकान महसूस होती है।
मानसिक या भावात्मक तनाव के कारण भले ही आप सो रहे हों, लेकिन आपका नर्वस सिस्टम पूरी तरह शांत नहीं हो पाता। तनाव के हार्मोन रात में भी काफी एक्टिव हो जाते हैं। इस वजह से दिमाग शांत मोड में नहीं जा पाता और व्यक्ति तरोताजा महसूस नहीं करता।
कम नींद या थकान के चक्कर में लोग मीठी चीजों और बार-बार कैफीन का सहारा लेते हैं। यह आदत पलभर के लिए तो ऊर्जा देती है, लेकिन थोड़ी देर बाद क्रैश का कारण बनती है। अत्यधिक कैफीन का सेवन रात की नींद के चक्र को भी बिगाड़ देता है।
अगर सही डाइट और बेहतर जीवनशैली के बावजूद थकान दूर नहीं हो रही है, तो यह किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकता है। थायराइड की समस्या, एनीमिया, स्लीप एपनिया या ब्लड प्रेशर में गड़बड़ी जैसे कारण आपकी ऊर्जा को लगातार कम कर सकते हैं।