भारत के अलावा सिर्फ एक और देश के पास है ब्रह्मोस मिसाइल, लेकिन वो रूस नहीं है

ब्रह्मोस मिसाइल, भारत का वो ताकतवर मिसाइल जो बिना दुश्मन को बताए, उसके इलाके में घुसती है और तबाही मचा देती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में यह तबाही मचा चुका है। इसकी ताकत से चीन भी खौफ खाता है। ब्रह्मोस मिसाइल को भारत और रूस ने मिलकर बनाया है, लेकिन इसका इस्तेमाल भारत ही कर सकता है या वो देश जिसे भारत चाहेगा। भारत के अलावा एक और देश के पास ब्रह्मोस मिसाइल है, जिसे उसने भारत से ही खरीदा है।

Authored by: शिशुपाल कुमारUpdated Jun 29 2025, 18:19 IST
रूस के पास क्यों नहीं है ब्रह्मोसImage Credit : Indian govt01 / 07

रूस के पास क्यों नहीं है ब्रह्मोस

रूस के पास ब्रह्मोस मिसाइल इसलिए नहीं है क्योंकि यह मिसाइल भारत और रूस का एक संयुक्त उपक्रम (joint venture) है, लेकिन इसका उत्पादन और ऑपरेशनल इस्तेमाल मुख्यतः भारत द्वारा किया गया है। ब्रह्मोस मिसाइल रूस के P-800 Oniks (Yakhont) की तकनीक पर आधारित है। मतलब रूस के पास इसका एक अलग वर्जन मौजूद है।

किन-किन देशों के पास ब्रह्मोसImage Credit : Indian govt02 / 07

किन-किन देशों के पास ब्रह्मोस

भारत के अलावा ब्रह्मोस मिसाइल फिलिपींस के पास है। फिलिपींस ने भारत से ही ब्रह्मोस मिसाइल को खरीदा है। भारत ने अब तक ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos) का एकमात्र वास्तविक ग्राहक फिलिपींस ही है, जहां जनवरी 2022 में ₹3,750 करोड़ के समझौते के तहत भेजा गया था। पहली बैच अप्रैल 2024 में पहुंचा, और दूसरी अप्रैल 2025 में। 

कौन सा देश ब्रह्मोस खरीदना चाह रहा हैImage Credit : Indian govt03 / 07

कौन सा देश ब्रह्मोस खरीदना चाह रहा है

ब्रह्मोस मिसाइल भारत से खरीदने के लिए कई देश लाइन में हैं। जिसमें इंडोनेशिया, वियतनाम, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर, ब्रुनेई, युएई, सऊदी अरब, ईजिप्ट, कतर, ओमान, और दक्षिण अफ्रीका इसे खरीदने के लिए भारत से बातचीत कर रहे हैं।

ब्रह्मास क्यों है इतना ताकतवरImage Credit : Indian govt04 / 07

ब्रह्मास क्यों है इतना ताकतवर

ब्रह्मोस मिसाइल को इतना ताकतवर (स्ट्रैटेजिकली और टेक्नोलॉजिकली एडवांस) माना जाता है क्योंकि यह दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है, और इसकी कई खूबियां हैं जो इसे खास बनाती हैं। यह ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज चलती है। इतनी तेज स्पीड से दुश्मन के पास प्रतिक्रिया करने का समय बेहद कम होता है। यह दुश्मन के रडार से बचने के लिए बहुत कम ऊंचाई (10 मीटर तक) पर उड़ सकती है। टारगेट के बहुत पास तक जाकर हमला करती है, जिससे इंटरसेप्ट करना मुश्किल हो जाता है। दुश्मन के बंकर, रडार स्टेशन, और युद्धपोतों को एक ही वार में तबाह कर सकती है। यह एंटी-जैमिंग और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से लड़ने की क्षमताओं से लैस है, जिससे यह इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप के बावजूद भी अपना रास्ता खोज सकती है।

ब्रह्मोस को कैसे किया जा सकता है लॉन्चImage Credit : Indian govt05 / 07

ब्रह्मोस को कैसे किया जा सकता है लॉन्च

ब्रह्मोस मिसाइल को चार अलग-अलग प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है, जिससे यह एक बेहद लचीला (flexible) और रणनीतिक रूप से शक्तिशाली हथियार बन जाता है। भारतीय वायुसेना के Sukhoi Su-30MKI फाइटर जेट से लॉन्च किया जाता है। मिसाइल को युद्धपोतों (Destroyers, Frigates) पर लगे वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) से दागा जाता है। ट्रक-माउंटेड मोबाइल लॉन्चर से मिसाइल दागी जाती है। पनडुब्बी के टारपीडो ट्यूब या वर्टिकल लॉन्च सेल से मिसाइल दागी जाती है।

ब्रह्मोस को कौन-कौन सी सेना करती है इस्तेमालImage Credit : Indian govt06 / 07

ब्रह्मोस को कौन-कौन सी सेना करती है इस्तेमाल

ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल भारत की तीनों सेनाएं — थल सेना (Army), नौसेना (Navy), और वायुसेना (Air Force) करती हैं। यह भारत की पहली मिसाइल है जिसे तीनों अंगों में ऑपरेशनल रूप से शामिल किया गया है। इसके अलानवा फिलिपींस की सेना भी इसका इस्तेमाल करती है।

ब्रह्मोस और हो रहा खतरनाकImage Credit : Indian govt07 / 07

ब्रह्मोस और हो रहा खतरनाक

ब्रह्मोस-NG (New Generation) वर्जन आने वाला है, जो और हल्का होगा और तेजस जैसे हल्के लड़ाकू विमान, सबमरीन, और छोटे युद्धपोतों में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। ब्रह्मोस II (Hypersonic Version) भी आ रहा है। हाइपरसोनिक तकनीक से दुनिया की टॉप मिसाइलों में शामिल होगा। इसकी स्पीड ध्वनि की गति से 6–8 गुना होगी। ब्रह्मोस ER भी आ रहा है, जो पहले से ही मौजूद लॉन्च प्लेटफॉर्म से ही ज्यादा दूरी पर हमला कर सकेगा।

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