नौसेना अपने लड़ाकू विमान को एयरक्राफ्ट कैरियर से संचालित करती है और ज्यादातर समय समुद्र में बिताते हैं, जहां की परिस्थितियां अलग होती है, जलवायु अलग होता है। साथ ही एयरक्राफ्ट कैरियर पर रवने बहुत छोटा होता है, फाइटर जेट रखने की जगह कम होती है। ऐसे में नौसेना को ऐसे लड़ाकू विमान की चाहिए होते हैं, जो छोटे रवने पर उड़ान भर सके, उसके विंग्स मुड़ सकें, ताकि ज्यादा से ज्यादा लड़ाकू विमान एयरक्राफ्ट कैरियर पर आ सके। साथ ही समुद्री वातावरण में टिक सके। समुद्र के खारे पानी और नमी से बचाने के लिए इन जेट्स में विशेष कोटिंग और मजबूत संरचना होती है। ये आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम से जुड़े होते हैं, जिससे जहाज, पनडुब्बी और अन्य विमानों के साथ रियल-टाइम में जानकारी साझा कर सकते हैं।
वायुसेना यानी कि एयरफोर्स के लिए परिस्थितियां अलग होती हैं, इनके पास नौसेना से ज्यादा रनवे होता है, हर तरह की जमीन पर इन्हें मौजूद रहना पड़ता है, चाहे वो मैदानी इलाका हो, पहाड़ी इलाका हो या फिर रेगिस्तान हो। इन्हें दुश्मन के लड़ाकू विमानों और ठिकानों पर हमला करने के लिए बनाया जाता है। ये भी मल्टी रोल होते हैं, लेकिन इनके हथियार भी नौसेना से अलग होता है।
वायुसेना और नौसेना के फाइटर जेट दिखने में भले समान लगें, लेकिन उनकी डिजाइन, क्षमता और उपयोग में कई अहम अंतर होते हैं। उदाहरण के लिए वायुसेना के Dassault Rafale और नौसेना के Dassault Rafale M के बीच यह फर्क साफ दिखता है। Dassault Rafale जैसे विमान लंबी दूरी तक मार करने, दुश्मन के विमानों से मुकाबला करने और जमीन पर सटीक हमले करने में सक्षम होते हैं। इनका ढांचा अपेक्षाकृत हल्का और फुर्तीला होता है, जिससे ये हवा में तेजी से दिशा बदल सकते हैं।
नौसेना के फाइटर जेट समुद्र में तैनात विमानवाहक पोत से उड़ान भरने और वहीं उतरने के लिए खास तौर पर डिजाइन किए जाते हैं। जैसे Dassault Rafale M में मजबूत लैंडिंग गियर और अरेस्टर हुक होता है, ताकि जहाज पर सीमित जगह में सुरक्षित लैंडिंग की जा सके। समुद्र के खारे पानी और नमी से बचाने के लिए इनमें विशेष कोटिंग और ज्यादा मजबूत ढांचा दिया जाता है। कुल मिलाकर, वायुसेना के जेट जमीन आधारित मिशनों के लिए बने होते हैं, जबकि नौसेना के जेट समुद्री युद्ध और कैरियर ऑपरेशन के लिए।
भारतीय वायुसेना (IAF) के पास कई आधुनिक और बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान हैं। इनमें प्रमुख रूप से Sukhoi Su-30MKI शामिल है, जो लंबी दूरी और भारी हथियार क्षमता वाला विमान है। इसके अलावा फ्रांस से खरीदा गया अत्याधुनिक Dassault Rafale हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों मिशनों में सक्षम है। स्वदेशी तकनीक से विकसित हल्का लड़ाकू विमान HAL Tejas भी धीरे-धीरे बेड़े का अहम हिस्सा बन रहा है। वहीं Mirage 2000 और MiG-29 जैसे विमान एयर डिफेंस और स्ट्राइक मिशनों में इस्तेमाल होते हैं, जबकि Jaguar मुख्य रूप से जमीन पर हमले के लिए तैनात है।
भारतीय नौसेना के पास फिलहाल मुख्य रूप से MiG-29K लड़ाकू विमान सक्रिय सेवा में हैं। ये विमान विमानवाहक पोत से उड़ान भरने और लैंडिंग करने में सक्षम हैं और समुद्री युद्ध, एयर डिफेंस तथा दुश्मन जहाजों पर हमले जैसे मिशनों के लिए तैनात किए जाते हैं। इसके अलावा भारत ने फ्रांस से Dassault Rafale M खरीदने का फैसला किया है, जो भविष्य में नौसेना के विमानवाहक पोतों पर तैनात होंगे। नौसेना ने स्वदेशी HAL Tejas Naval का भी परीक्षण किया था, हालांकि फिलहाल उसे नियमित सेवा में शामिल नहीं किया गया है।
दुनिया का “सबसे खतरनाक” नौसैनिक फाइटर जेट किसे कहा जाए, यह उसकी मारक क्षमता, तकनीक, स्टील्थ, हथियारों और ऑपरेशन रेंज पर निर्भर करता है। मौजूदा समय में अमेरिकी नौसेना का F-35C Lightning II सबसे उन्नत और घातक नौसैनिक लड़ाकू विमानों में माना जाता है। यह पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर है, जो दुश्मन के रडार से बचते हुए गहरे अंदर तक हमला कर सकता है। इसमें अत्याधुनिक सेंसर, नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध प्रणाली और लंबी दूरी की मिसाइलें लगाने की क्षमता है, जिससे यह हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों मिशनों में बेहद प्रभावी बनता है।