Onion Prices : अगर आपके घर में प्याज खरीदने पर जेब पर भारी असर पड़ रहा था, तो आपके लिए एक बहुत अच्छी खबर है। बाजार में 60 से 65 रुपये किलो बिकने वाला प्याज अब आपको आधी कीमत, यानी सिर्फ 35 रुपये प्रति किलो में मिल रही है। सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए सस्ती प्याज बेचने का काम शुरू कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से देशभर में प्याज के दाम बहुत तेजी से बढ़ रहे थे। आम तौर पर जो प्याज सस्ते में मिल जाती थी, वह दुकानों पर 60 रुपये से लेकर 65 रुपये प्रति किलो तक बिकने लगी थी। प्याज महंगी होने की वजह से रसोई का बजट बिगड़ गया था। चाहे घर का खाना हो या बाहर का स्ट्रीट फूड, सब जगह प्याज महंगी होने का असर दिखने लगा था।
किसने शुरू की सस्ती प्याज की बिक्री?
प्याज की बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग की सचिव निधि खरे ने नई दिल्ली के कृषि भवन से प्याज की खास गाड़ियों (वैन) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये गाड़ियां जगह-जगह जाकर लोगों को सस्ते दामों में प्याज बेच रही हैं।
कहां से खरीद सकते हैं सस्ती प्याज?
फिलहाल दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों (दिल्ली-NCR) में 35 रुपये प्रति किलो वाली प्याज की बिक्री शुरू कर दी गई है। आप इसे नीचे दी गई जगहों से आसानी से खरीद सकते हैं।
- सरकारी आउटलेट्स:- एनसीसीएफ (NCCF), नेफेड (NAFED) और केंद्रीय भंडार की दुकानों पर।
- मोबाइल वैन:- सरकार की तरफ से चलाई जा रही खास गाड़ियों (मोबाइल वैन) से, जो अलग-अलग इलाकों में घूम-घूमकर प्याज बेच रही हैं।
क्या देश में प्याज की कमी हो गई है?
सस्ती प्याज बिकने के साथ ही लोगों के मन में यह सवाल भी आ रहा था कि क्या देश में प्याज का स्टॉक खत्म हो रहा है? दरअसल, इस साल सरकार ने किसानों से 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था। लेकिन किसानों को स्थानीय मंडियों में ज्यादा अच्छे दाम मिल रहे थे, इसलिए उन्होंने सरकार को सिर्फ 1.20 लाख टन प्याज ही बेची। इस वजह से लोगों को लगा कि आने वाले दिनों में प्याज की कमी हो सकती है।
सरकार ने दिया भरोसा
प्याज की कमी की अफवाहों पर सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने साफ जवाब दिया है। मंत्रालय ने कहा कि देश में प्याज का उत्पादन बहुत अच्छा हुआ है। इस साल करीब 307 लाख मीट्रिक टन से भी ज्यादा प्याज पैदा होने का अनुमान है। सरकार के पास प्याज का पर्याप्त भंडार मौजूद है। इसलिए आने वाले महीनों में देश में प्याज की बिल्कुल भी कमी नहीं होगी। सरकार सही समय पर बाजार में प्याज उतार रही है ताकि कीमतें नियंत्रण में रहें और आम लोगों को महंगी प्याज न खरीदनी पड़े।
किसानों को मिले सिर्फ 1 रुपये प्रति किलो
खेत से बिकने वाली कीमत और रिटेल कीमत के बीच बड़े अंतर को लेकर किसान संगठनों ने इसकी आलोचना की है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है। टिकैत ने कहा कि प्याज उगाने वाले किसानों को केवल 1 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिल रहा है, जो बेहद निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि यही स्थिति कुछ समय पहले आलू के साथ भी हुई थी। सरकार को NAFED (नेफेड) और NCCF जैसी एजेंसियों को निर्देश देना चाहिए था कि वे किसानों से कम से कम 10 रुपये प्रति किलो के न्यूनतम भाव पर प्याज खरीदें। अगर सरकार समय रहते यह कदम उठाती, तो आज न किसानों का नुकसान होता और न ही आम जनता को महंगी प्याज खरीदनी पड़ती।
सरकार का जवाब: गिरावट के वक्त की थी खरीद
किसान संगठनों के आरोपों पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब प्याज के दाम बहुत ज्यादा गिर गए थे, तब सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप किया था। सरकार ने खुद महाराष्ट्र के किसानों से प्याज की खरीद की थी। हालांकि, कृषि मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि अब किसान अपना अधिकांश स्टॉक बेच चुके हैं और अब जाकर रिटेल में प्याज 60 रुपये किलो के पार पहुंची है। उन्होंने चिंता जताते हुए सवाल उठाया कि आखिर रिटेल में मिल रहे ऊंचे दामों का सही हिस्सा किसानों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है।
'कांदा एक्सप्रेस' से राहत देने की कोशिश
प्याज के साथ-साथ चीनी के दामों में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बीते एक महीने में चीनी के रेट 48 रुपये से बढ़कर सीधे 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। इस वजह से आगामी त्योहारों पर आम परिवारों का बजट बिगड़ना तय माना जा रहा है। प्याज की आसमान छूती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने 'कांदा एक्सप्रेस' (स्पेशल ट्रेन) की शुरुआत की है। इसके जरिए करीब 800 टन प्याज को बड़े शहरों और खपत वाले इलाकों में भेजा जा रहा है, ताकि सरकारी आउटलेट्स के माध्यम से लोगों को 35 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर प्याज उपलब्ध कराया जा सके।
